हिमाचल में प्रकृति ने फिर ढाया कहर, अब भूकंप ने हिला दी धरती, लोगों में खौफ

हिमाचल प्रदेश में प्रकृति अपना कहर बरसाने में लगी हुई है। यहां भारी बारिश और लैंडस्लाइड के बीच भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए हैं। शिमला में गुरुवार सुबह करीब 8 बजे भूकंप के ताबड़़तोड़ झटकों ने लोगों को घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। मौसम विभाग के शिमला केंद्र ने इस बारे में पुष्टि की है। भूकंप के बारे में मिली जानकारी के मुताबिक, गुरुवार सुबह 7 बजकर 58 मिनट पर भूकंप आया है। इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.8 मापी गई है। फिलहाल यहां किसी प्रकार के जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन हल्की तीव्रता होने की वजह से कहीं-कहीं लोगों को ये झटके महसूस हुए, कहीं नहीं महसूस हुए। बता दें, भूकंप का केंद्र शिमला से 10 किलोमीटर दूर था।

इन जिलों में अलर्ट जारी
पहाड़ी क्षेत्र हिमाचल में सबसे अधिक भूकंप चंबा जिले में आते हैं। साथ ही किन्नौर, शिमला, बिलासपुर और मंडी भी अलर्ट जोन में रहते हैं। ऐसे में शिमला को लेकर भी चेतावनी जारी की गई थी कि यह शहर भूकंप जैसी आपदा के लिए तैयार नहीं है। वहीं किन्नौर में सन् 1975 में बड़ा भूकंप आ चुका है। जबकि कांगड़ा में सन् 1905 में भीषण भूकंप आया था, जिसमें करीब 20,000 लोगों की जान चली गई थी। तबाही के मंजर की तस्वीरें आज भी लोगों से भुलाई नहीं जाती हैं। इससे पहले बीते दिन बुधवार को हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में एक बार फिर 16 दिन बाद भयंकर तबाही मची। यहां पहाड़ों से मौत बनकर आई आफत ने 10 लोगों की जान ले ली और 50 से ज्यादा लोगों के फंसे होने की आशंका है।

भावानगर से 10 किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे-5 पर निगुलसरी के पास यात्रियों से भरी एचआरटीसी बस, ट्रक, दो कारों और अखबार की गाड़ी पर अचानक चट्टानें गिर गईं। जिससे ये दर्दनाक हादसा हुआ। किन्नौर (Kinnaur) में हुए इस हादसे में 2 साल की बच्ची समेत 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 60 लोगों के मलबे में फंसने की आशंका है। ऐसे में अब तक 14 लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया है। फिलहाल आईटीबीपी, एनडीआरएफ, सेना, पुलिस और स्थानीय लोग मदद में जुटे हुए हैं। हादसे का शिकार हुई उत्तराखंड के हरिद्वार जा रही एचआरटीसी की बस में 25 लोग फंसे हैं। लेकिन बस ड्राइवर (Bus Driver) औरं कंडक्टर को बचा लिया गया है, पर हादसे से दोनों अभी सदमे में हैं। यहां मलबा हटाने का काम लगातार जारी है।