लखीमपुर खीरी समझौते पर राकेश टिकैत को लेकर चर्चाए गर्म, लोग बोलेः ऐसा क्या था जो इतना…

लखीमपुर खीरी। लखीमपुर खीरी के खौफनाक घटनाक्रम के बीच पिछले 24 घंटे के भारी तनाव के बीच आज सरकार और किसान नेता राकेश टिकैत के बीच समझौता हो गया। इस समझौते को लेकर एक ओर जहां लोग सीएम योगी आदित्यनाथ की प्रशासनिक क्षमता की तारीफ कर रहे है, वहीं आम लोगों के बीच एक जोरदार चर्चा चल निकली है। लोगों का कहना है कि जिस लखीमपुर को योगी सरकार ने किले में तब्दील कर दिया और किसी भी नेता को वहां घुसने नहीं दिया, फिर राकेश टिकैत वहां आसानी से कैसे पहुंच गये, पुलिस प्रशासन ने उन्हें क्यों नहीं रोका। पहुंचे तो पहुंचे बिना किसी अन्य किसान नेता की मौजूदगी के सरकार से राकेश टिकैत ने अकेले ही समझौता भी कर दिया, ये बात लोगों को आसानी से हजम नहीं हो रही है।

गौरतलब है कि कल के लखीमपुर कांड के बीच किसान नेता राकेश टिकैत तो लखीमपुर खीरी आसानी से पहुंच गए, उन्हें रोकने की प्रशासन की ओर से कोई कोशिश नहीं की गई। जबकि कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी, आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सदस्य संजय सिंह व भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को योगी सरकार ने कैद करके रख दिया। लोग सवाल कर रहे है कि ऐसा क्या था कि राकेश टिकैत को प्रशासन की विशेष सहूलियत मिल पाई। प्रशासन के साथ समझौते में भी राकेश टिकैत के अलावा किसी अन्य किसान नेता को लखीमपुर पहुंचने ही नहीं दिया गया, साथ ही किसी अन्य नेता को वार्ता में शामिल भी नहीं किया गया।

यूपी प्रशासन ने सारे राजनेताओं को लखीमपुर खीरी और तिकुनिया पहुंचने से रातों-रात रोक लिया. प्रियंका गांधी को सीतापुर में रोका गया, चंद्रशेखर आजाद को सीतापुर टोल प्लाजा पर रोका गया. इसी तरह अन्य नेता जैसे शिवपाल यादव, अखिलेश यादव, जयंत चौधरी को लखीमपुर पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया. इस बीच सिर्फ एक ’नेता’ वहां पहुंचे, वह थे राकेश टिकैत।

राकेश टिकैत गाजीपुर बॉर्डर से रात को ही चले और देर रात को ही लखीमपुर खीरी के तिकुनिया के उस गुरुद्वारे में पहुंच गए जहां चारों किसानों के शव रखे हुए थे. किसान किसी सूरत में चारों शवों के पोस्टमार्टम को तैयार नहीं थे, मांग थी कि बीजेपी के गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी पर मुकदमा दर्ज हो उनके बेटे को गिरफ्तार किया जाए. इसके साथ-साथ गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के इस्तीफे की मांग थी।

किसानों की भारी नाराजगी को देखते हुए ऐसा लग रहा था कि सरकार के लिए किसानों को मनाना बेहद मुश्किल होगा, लेकिन राकेश टिकैत ने प्रशासन की मुश्किलों को आसान कर दिया और कुछ ही घंटों में मामला समझौते तक पहुंच गया। शायद इसीलिये समझौता वार्ता में किसी ओर को शामिल नहीं होने दिया गया। साथ ही राकेश टिकैत ने भी इस समझौता में किसी अन्य किसान नेता या राजनीतिक दलों के शामिल किये जाने की प्रशासन से कोई मांग नहीं की। किसानों के साथ लखीमपुर का मामला सिख समुदाय से भी जुडा था, लेकिन समझौते में किसी भी सिख किसान नेता को शामिल न किया जाना भी खासा चर्चा में है। योगी सरकार के लिये मुश्किल दिख रहा माहौल राकेश टिकैत ने बिल्कुल आसान बना दिया।