लखीमपुर खीरी मामला: केंद्रीय मंत्री की जा सकती है कुर्सी, CM से PM तक ने कहा- कोई बच नहीं पाएगा

नई दिल्ली: भाजपा नेता और प्रवक्ता लगातार गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए वो लगातार विपक्ष पर हमला कर रहे हैं, लेकिन जिस तरह से ये घटना हुई है। उससे एक बात तो साफ है कि भाजपा को यूपी में बड़ी नुकसान की चिंता सता रही है। 2022 की चुनावी तैयारियों में जुटी यूपी भाजपा के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

मीडिया रिपोर्टों की मानें तो टेनी का केंद्रीय मंत्री का पद बचा रहना मुश्किल लग रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखीमपुर खीरी की घटना को लेकर प्रधानमंत्री को अपनी चिंताएं बता दी हैं। राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। लखीमपुर खीरी प्रकरण से न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बल्कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा आहत बताए जा रहे हैं।

पूरा प्रकरण किसानों से जुड़ा है और इसलिए टेनी की परेशानी बढ़ना तय माना जा रहा है। इस प्रकरण में प्रधानमंत्री मोदी कभी भी बड़ा फैसला ले सकते हैं।कृषि मंत्री तोमर के सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं नहीं होनी चाहिए। हालांकि वह कहते हैं कि यह संगठन और उत्तर प्रदेश सरकार से जुड़ा मामला है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के कामकाज से इसका कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन मीडिया और सोशल मीडिया में जो प्रसारित हो रहा है, उस आधार पर इसे अच्छा नहीं कहा जा सकता।

मामला केंद्र सरकार के मंत्री के परिवार से जुड़ा है। माना जा रहा है कि आशीष मिश्रा पर पुलिस और जांच एजेंसी की जांच प्रक्रिया शुरू होते ही केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के खिलाफ कार्यवाही का दबाव बनने लगेगा। इसके बाद उत्तर प्रदेश भाजपा और राज्य सरकार पर भी इसकी कुछ न कुछ आंच आएगी। इसलिए सरकार और भाजपा का संगठन दोनों जांच प्रक्रिया, वायरल वीडियो की सच्चाई की जांच का सहारा लेकर काफी फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पीड़ितों के लिए मुआवजे की घोषणा के बाद मामला ठंडा पड़ने लगा था, लेकिन वायरल हुए वीडियो ने इसे फिर से भड़का दिया है। अब देखना है कि आगे क्या होता है। पुलिस के एक आला अधिकारी ने कहा कि मामले की जांच चल रही है। मुख्यमंत्री ने स्वयं कह दिया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वह चाहे कितना भी बड़ा चेहरा क्यों न हो? डीएम, एसपी और राज्य सरकार के अधिकारी मामले को लेकर संवेदनशील हैं।