रूस के रोबोट टैंक को देख दहशत में दुनिया, ‘स्वार्म ड्रोन’ के साथ 100 किमी तक लगा रहा गश्त

मॉस्को। अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच रूस ने अपने दूसरे रोबोट टैंक (UGV) मॉर्कर अनमैंड ग्राउंड वीकल को दुनिया के सामने पेश किया है। यह टैंक इतनी आधुनिक तकनीक से लैस है कि 100 किलोमीटर की दूरी तक बिना किसी इंसान की मदद के गश्त कर रहा है। इतना ही नहीं, यह टैंक अपने साथ स्वार्म ड्रोन की पूरी फौज लेकर चल रहा है। ऐसे में रूस का यह नया हथियार पलक झपकते किसी भी सैन्य ठिकाने को तबाह कर सकता है। यूरन -9 के बाद यह रूस का दूसरा रोबोट टैंक है। अभी इस टैंक का यूजर ट्रायल चल रहा है, लेकिन जल्द ही इसे रूसी सेना में शामिल किया जा सकता है।

इन हथियारों से लैस है रूस का मार्कर UGV
मॉर्कर अनमैंड ग्राउंड वीकल को रूस की हथियार निर्माता कंपनी फाउंडेशन फॉर एडवांस्ड स्टडीज (FPI) ने विकसित किया है। इस टैंक में 7.62 मिमी की मशीन गन लगी हुई है, जिससे हर मिनट सैकड़ों राउंड फायरिंग की जा सकती है। इसके अलावा इस रोबोट टैंक में गाइडेड एंटी टैंक मिसाइलों को भी तैनात किया गया है। इसमें लगे स्वार्म ड्रोन मिनटों में उड़ान भरकर खुफिया जानकारी जुटाने और लक्ष्य को तबाह करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

100 किलोमीटर तक लगा रहा गश्त
इस रोबोट टैंक का परीक्षण रूस के चेल्याबिंस्क क्षेत्र की पहाड़ियों पर किया गया है। जिसमें इस टैंक ने 100 किलोमीटर की दूरी पूरी तरह से स्वायत्त होकर तय की है। इस दौरान किसी भी इंसान ने रोबोट को बाहर से कमांड नहीं दिया है। ऑन रोड और ऑफ रोड के इस ट्रैक को पूरा करने में मॉर्कर अनमैंड ग्राउंड वीकल को 5 घंटे का समय लगा।

अपना रास्ता खुद चुनता है यह टैंक
बताया जा रहा है कि इस रोबोट टैंक के ऑपरेटर को केवल प्रारंभ और समाप्ति बिंदुओं का चयन करने की आवश्यकता होती है। उसके बाद यह रोबोट टैंक कैमरे और अन्य सेंसर का उपयोग करते हुए खुद अपना रास्ता ढूंढ लेता है। बड़ी बात यह है कि यह टैंक सबसे नजदीक वाले रास्ते का चयन कर रास्ते में आने वाली बाधाओं से भी अपना बचाव करता है।

स्वार्म ड्रोन उड़ा रहा यह रोबोट टैंक
अलग-अलग परीक्षणों में मॉर्कर अनमैंड ग्राउंड वीकल को स्वॉर्म ड्रोन से भी लैस किया गया था। 2019 के एक वीडियो में, मार्कर को पंद्रह ड्रोन के एक समूह के साथ काम करते हुए दिखाया गया था। इस दौरान टैंक ने 5-5 के तीन झुंड में ड्रोन को उड़ाकर अपनी ताकत भी दिखाई थी। दरअसल, लंबे समय से रूस ऐसे हथियार की तलाश कर रहा था जो दुश्मन के क्षेत्र में अंदर तक घुसकर स्वार्म ड्रोन क लॉन्च कर सके। ऐसे में अब रूस की यह आवश्यक्ता पूरी होती दिखाई दे रही है।

क्या है स्वार्म ड्रोन टेक्नोलॉजी
कई ड्रोन जब एक साथ मिलकर एक मिशन को अंजाम देते हैं तो इस सिस्टम को ड्रोन स्वॉर्मिंग या स्वार्म ड्रोन टेक्नोलॉजी कहते हैं। इनमें एक मदर ड्रोन होती है, जिसके अंदर से कई सारे छोटे-छोटे ड्रोन निकलते हैं जो अलग-अलग ठिकानों पर हमला करने में सक्षम होते हैं। अधिक संख्या के कारण दुश्मन की एंटी एयरक्राफ्ट गन या मिसाइलें भी इनके ऊपर बेअसर साबित होती हैं। यह नई टेक्नॉलजी भविष्य में युद्ध के पूरे सीन को ही बदलने की क्षमता रखती है। यह टेक्नोलॉजी नो कॉन्टेक्ट वॉरफेयर यानी बिना किसी इंसानी कॉन्टेक्ट से युद्ध में यह बेहद अहम साबित होगी।

भारी तबाही मचा सकते हैं ये ड्रोन
स्वार्म ड्रोन दुश्मन के इलाके में भारी तबाही मचाने में सक्षम होते हैं। कम लागत, हल्के वजन और हाई टेक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तकनीकी से लैस ये ड्रोन किसी भी लक्ष्य को बर्बाद करने में सक्षम होते हैं। स्वार्म ड्रोन दुश्मन के इलाके में सक्रिय एयर डिफेंस सिस्टम और रडार को भी धोखा देने में सक्षम होते हैं। छोटे आकार के कारण रडार भी इन ड्रोन को पकड़ पाने में अधिकतर नाकाम ही साबित होते हैं।

रूस का यूरेन-9 कितना खतरनाक
रूसी मीडिया के अनुसार, यूरन -9 खुद के कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से टारगेट को ट्रैक कर सकता है, लेकिन उसपर फायर करने का आदेश टैंक से तीन किलोमीटर की दूरी पर बैठा गनर देता है। यह टैंक पूरी तरह से रिमोट कंट्रोल्ड होती है। इसमें एक 30 मिमी की ऑटोमेटिक बंदूक, अताका एंटी-टैंक मिसाइल और श्मेल फ्लेमेथ्रो जैसे हथियार तैनात रहते हैं।