राहुल गांधी का बड़ा खुलासा, बोले- न होती चाचा संजय की मौत, अगर मान गए होते ये बात

नई दिल्ली: यूथ कांग्रेस की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के जीवन से जुड़ी तस्वीरों की प्रदर्शनी लगाई गई है। इन्हीं चित्रों से जुड़ी यादों को साझा करते हुए राहुल गांधी ने एक वीडियो के माध्यम से परिवार से जुड़ी कई बातों का खुलासा किया है। राहुल ने कहा कि चाचा संजय गांधी मेरे पिता राजीव गांधी की बात मान लेते तो शायद हादसा न होता और चाचा की मौत न होती।

कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी अपने पिता राजीव गांधी की तरह प्‍लेन उड़ाने का शौक रखते हैं। हाल में भारतीय युवा कांग्रेस की ओर से आयोजित राजीव गांधी फोटो प्रदर्शनी में बनाए गए वीडियो में राहुल गांधी ने अपने पिता के साथ प्‍लेन में बिताए गए समय को याद किया। और पिता को याद करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उनका मानना है कि पायलट होने से जीवन में भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है और बड़े स्तर पर चीजों को देखने का नजरिया बदलता है। कांग्रेस के सोशल मीडिया अकाउंट पर गुरुवार को शेयर किए गए एक वीडियो में राहुल गांधी ने खुलासा करते हुए बताया कि जिस दिन राजीव के भाई संजय गांधी का विमान दुर्घटना में निधन हुआ था। पिता ने चाचा संजय गांधी को पिट्स जैसे आक्रामक विमान उड़ाने से मना किया था, लेकिन वह नहीं माने।

आगे राहुल गांधी ने कहा कि विमान उड़ाने का जितना अनुभव उनके पास है 300-350 घंटे, उतना ही चाचा संजय गांधी के पास भी था। संजय गांधी भी विमान उड़ाने के शौकीन थे और 23 जून, 1980 को एक विमान दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। राहुल ने एक फोटो को देखकर बताया कि पिता अक्सर उन्हें कॉकपिट में बैठाते थे और तमाम सवालों का जवाब देते थे। राहुल ने कहा कि सोनिया गांधी कई बार पिता के प्लेन उड़ाने पर रहती थीं।

23 जून 1980 को हुआ था संजय गांधी का निधन
नई दिल्ली के सफदरजंग हवाई अड्डे के पास 23 जून 1980 को संजय गांधी का विमान दुर्घटना में निधन हो गया था। 23 जून 1980 की ये घटना भारत के इतिहास की एक ऐसी घटना है, जिसने देश की राजनीति के सारे समीकरण बदल दिए थे। एक विमान दुर्घटना में देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी का निधन हो गया था। उस समय संजय गांधी को इंदिरा गांधी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता था, लेकिन उनके निधन से देश की सियासी हवाएं पूरी तरह बदल गईं। और संजय गांधी के निधन के चार बरस बाद जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई तो उनके बड़े बेटे राजीव गांधी को उनकी विरासत संभालनी पड़ी। बाद में एक चुनावी सभा में बम हमले में राजीव गांधी की भी हत्या कर दी गई।