मौत के बाद भी पीछा नहीं छोड़ते हैं ऐसे महापाप, इनसे बचें वरना नर्क में झेलनी पड़ेंगी यातनाएं

नई दिल्‍ली: अच्‍छी जिंदगी, आसान मौत और उसके बाद स्‍वर्ग पाने के लिए अच्‍छे कर्म करने चाहिए. इसीलिए धर्म, ज्‍योतिष और खासतौर पर गरुड़ पुराण में कर्मों को लेकर बहुत विस्‍तार से बताया गया है कि किस तरह के कर्म व्‍यक्ति को नर्क में ले जाते हैं और कौन से कर्म उसे स्‍वर्ग दिलाते हैं. यही वजह है गरुड़ पुराण को महापुराण कहा गया है क्‍योंकि यह जिंदगी, मौत और मौत के बाद आत्‍मा के सफर के बारे में भी बताता है. आइए उन कर्मों के बारे में जानते हैं जिन्‍हें गरुड़ पुराण में महापाप का दर्जा दिया गया है.

मौत के बाद सहनी पड़ती हैं यातनाएं
भ्रूण हत्‍या: कोख में ही बच्‍चे को मार देने से बड़ा कोई पाप नहीं है. गरूड़ पुराण में इसे महापाप का दर्जा दिया गया है. ऐसा करने वालों को नर्क में बेहद कष्‍टदायी यातनाएं सहनी पड़ती हैं. लिहाजा ऐसी गलती भूलकर भी न करें.

महिला का अपमान: सनातन धर्म में महिला का अपमान करने को बहुत ही बुरा माना गया है. उस पर असहाय, विधवा महिला का अपमान करने वालों को नर्क में भी जगह नहीं मिलती है. ऐसे लोगों की आत्‍मा भटकती रहती है और बहुत यातनाएं सहती है.

असहायों का अपमान: किसी भी विकलांग, बुजुर्ग या असहाय व्‍यक्ति का अपमान करना, उनका मजाक उड़ाना नर्क में जाने का इंतजाम करना है. ऐसे लोगों को नर्क में बहुत दुख भोगने पड़ते हैं.

धर्म-ग्रंथ का अपमान: गरुड़ पुराण में कहा गया है कि हर व्‍यक्ति को अपने मनमुताबिक धर्म मानना चाहिए लेकिन गलती से भी उसे किसी दूसरे धर्म या ग्रंथ का अपमान नहीं करना चाहिए. ऐसा करना उन्‍हें नर्क में जगह दिलाने के लिए काफी है.

पराई महिला को बुरी नजर से देखना: पराई महिला को बुरी नजर से देखना, उसके साथ जबरदस्‍ती करना महापाप है. यह उस महिला का अपमान है. ऐसा करने वाले लोगों को नर्क में बहुत यातनाएं दी जाती हैं.