बुजुर्गों की सेवा में पहले नंबर पर राजस्थान, जानें अपने राज्य का हाल

नई दिल्ली: इंस्टीट्यूट फॉर कम्पिटिटिवनेस द्वारा तैयार ‘बुजुर्गों के लिए जीवन का गुणवत्ता सूचकांक’ की रिपोर्ट में राजस्थान अव्वल रहा है। यह लिस्ट देश की बुजुर्ग आबादी के कल्याण का आकलन करता है। रिपोर्ट में 50 लाख बुजुर्गों की आबादी वाले ‘वृद्ध’ और 50 लाख से कम बुजुर्गों की आबादी वाले ‘अपेक्षाकृत वृद्ध’ राज्यों को श्रेणी में रखा गया है।

राजस्थान बुजुर्गों की सेवा करने में सबसे ऊपर रहा है
हिमाचल प्रदेश अपेक्षाकृत वृद्ध सूची में सबसे आगे है। जबकि उत्तराखंड और हरियाणा क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।चंडीगढ़ और मिजोरम केंद्र शासित प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों की श्रेणियों में शीर्ष स्कोर थे। वहीं दूसरी ओर, तेलंगाना और गुजरात ने वृद्ध और अपेक्षाकृत वृद्ध राज्यों की श्रेणियों में सबसे कम स्कोर किया है। जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को केंद्र शासित प्रदेश और उत्तर-पूर्वी राज्यों के क्षेत्रों में सबसे नीचे रखा गया है।

पिछले सालों के आंकड़ों से तुलना
देश में कुल आबादी के प्रतिशत के रूप में बुजुर्गों की हिस्सेदारी वर्ष 2001 में लगभग 7.5 प्रतिशत थी। जो बढ़कर वर्ष 2026 तक लगभग 12.5 प्रतिशत हो जाएगी तथा वर्ष 2050 तक 19.5 प्रतिशत से अधिक होने की उम्मीद है।

EAC-PM के अनुरोध पर इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्पिटिटिवनेस द्वारा यह सूचकांक तैयार किया गया है। जो ऐसे मुद्दों पर प्रकाश डालता है। जिनका अक्सर बुजुर्गों के सामने आने वाली समस्याओं में उल्लेख नहीं किया जाता है। प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) एक गैर-संवैधानिक, गैर-सांविधिक, स्वतंत्र निकाय है। जिसका गठन भारत सरकार, विशेष रूप से प्रधानमंत्री को आर्थिक और संबंधित मुद्दों पर सलाह देने के लिये किया गया।

भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग, भारत में केंद्रित एक अंतर्राष्ट्रीय पहल है। जो प्रतिस्पर्द्धा और रणनीति पर अनुसंधान व ज्ञान के निकाय के विस्तार एवं उद्देश्यपूर्ण प्रसार के लिये समर्पित है। यह निष्पक्ष रैंकिंग के माध्यम से राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ावा देगी तथा उन स्तंभों और संकेतकों पर प्रकाश डालेगी जिनमें वे सुधार कर सकते हैं।

सूचकांक के स्तंभ और उप-स्तंभ
रिपोर्ट को चार मानकों के आधार पर यह सूचकांक तैयार किया जाता है। इसमें वित्तीय कल्याण, सामाजिक कल्याण, स्वास्थ्य प्रणाली और आय सुरक्षा शामिल हैं। इनमें आर्थिक सशक्तिकरण, शैक्षिक प्राप्ति और रोजगार, सामाजिक स्थिति, शारीरिक सुरक्षा, बुनियादी स्वास्थ्य, मनोवैज्ञानिक कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और सक्षम वातावरण जैसे आठ उप मानक भी शामिल हैं।

स्तंभवार आधार पर प्रदर्शन
स्वास्थ्य प्रणाली स्तंभ का अखिल भारतीय स्तर पर उच्चतम राष्ट्रीय औसत 66.97 है। जिसके बाद सामाजिक कल्याण स्तंभ का स्कोर 62.34 है। वहीं वित्तीय कल्याण का स्कोर 44.7 है। जो शिक्षा प्राप्ति और रोजगार स्तंभ में 21 राज्यों के निम्न प्रदर्शन से कम है। यह सुधार की संभावना को प्रदर्शित करता है।

राज्यों ने आय सुरक्षा स्तंभ में विशेष रूप से खराब प्रदर्शन किया है। क्योंकि आधे से अधिक राज्यों का आय सुरक्षा में राष्ट्रीय औसत से कम स्कोर है। जो सभी स्तंभों में सबसे कम है।रिपोर्ट के अनुसार 50 लाख से ज्यादा बुजुर्ग आबादी वाले राज्यों का गुणवत्ता सूचकांक इस तरह है। राजस्थान 54.61, महाराष्ट्र 53.31, बिहार 51.82, तमिलनाड 47.93, मध्यप्रदेश 47.11, कर्नाटक 46.92 , उत्तर प्रदेश 46.80, आंध्र प्रदेश 44.37, पश्चिम बंगाल 41.01 और तेलंगाना 38.19 गुणवत्ता सुचकांक रहा।

50 लाख से कम बुजुर्गों की आबादी वाले राज्य
50 लाख से कम बुजुर्ग आबादी वाले राज्यों का गुणवत्ता सूचकांक इस प्रकार है। हिमाचल 61.04, उत्तराखंड 59.47, हरियाणा 58.16, ओडिशा 53.95, झारखंड 53.40, गोवा 52.56, केरल 51.49, पंजाब 50.87, छत्तीसगढ़ 49.78 और गुजरात 49.00 गुणवत्ता सुचकांक रहा है।

पूर्वोत्तर के राज्यों का गुणवत्ता सूचकांक- पूर्वोत्तर के राज्यों का गुणवत्ता सूचकांक क्रमशः मिजोरम 59.79, मेघालय 56.00, मणिपुर 55.71, असम 53.13, सिक्किम 50.82, नागालैंड 50.77, त्रिपुरा 49.18 और अरुणाचल 39.28 रहा।

केंद्रशासित प्रदेश का गुणवत्ता सूचकांक- केंद्रशासित प्रदेश का गुणवत्ता सूचकांक क्रमशः चंडीगढ़ 63.78, दादरा एवं नगर हवेली 58.58, अंडमान निकोबार 55.54, दिल्ली 54.39, लक्षद्वीप 53.79, दमन और दीव 53.28, पुडुचेरी 53.03 और जम्मू-कश्मीर 46.16 रहा।

क्या हैं चुनौतियां
जनसंख्या में लोगों की सामान्य आयु के उभरते मुद्दों में से एक “महिलाओं की अधिक आयु प्रत्याशा” है। जिसके परिणामस्वरूप वृद्धावस्था के कुल प्रतिशत में महिलाओं का अनुपात पुरुषों की तुलना में अधिक होता है। भारत में विश्व स्तर पर सबसे कमज़ोर सामाजिक सुरक्षा तंत्र है।

क्योंकि यह अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का केवल 1% पेंशन पर खर्च करता है। वर्तमान वृद्ध व्यक्ति की विशिष्ट ज़रूरतों, प्रेरणाओं और वरीयताओं को पूरा करने तथा सक्रिय आयु को बढ़ावा देने के साथ उन्हें समाज में योगदान करने का मौका देने की आवश्यकता है।

स्वस्थ आयु में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिये अच्छा स्वास्थ्य समाज के मूल में है। जैसे-जैसे भारत में वृद्ध लोगों की जीवन प्रत्याशा बढ़ती है। वैसे वैसे हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि लोग अधिक आयु तक जीवित रहें। और स्वस्थ जीवन जिए।

संबल पहुंचाने हेतु सरकारी योजनाएं
सीनियर केयर एजिंग ग्रोथ इंजन (SAGE): सेज पोर्टल (SAGE Portal) विश्वसनीय स्टार्टअप्स के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों की देखरेख में उपयोगी उत्पादों तथा सेवाओं को प्रदान करने वाला ‘वन-स्टॉप एक्सेस’होगा।

वृद्ध व्यक्तियों के लिये एकीकृत कार्यक्रम (IPOP): योजना का मुख्य उद्देश्य आश्रय, भोजन, चिकित्सा देखभाल और मनोरंजन के अवसर आदि जैसी बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करके वृद्ध व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है।

राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY): इसका उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे (BPL) की श्रेणी के वरिष्ठ नागरिकों को शारीरिक सहायता और जीवन यापन के लिये आवश्यक उपकरण प्रदान करना है। जो कम दृष्टि, श्रवण दोष, दांतों की हानि तथा चलने में अक्षमता जैसी आयु से संबंधित अक्षमताओं से पीड़ित हैं।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना: इस योजना के तहत भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों और गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले परिवारों से संबंधित व्यक्तियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY): यह वरिष्ठ नागरिकों के लिये एक पेंशन योजना है। जिसके तहत मासिक, त्रैमासिक, अर्द्ध-वार्षिक या वार्षिक आधार पर 10 वर्षों की अवधि के लिये गारंटीड रिटर्न की व्यवस्था की गई है।

वयोश्रेष्ठ सम्मान: 1 अक्तूबर को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर वरिष्‍ठ नागरिकों की सराहनीय सेवा करने वाले संस्‍थानों और वरिष्‍ठ नागरिकों को उनकी उत्तम सेवाओं तथा उपलब्धियों के लिये यह राष्ट्रीय सम्‍मान प्रदान किया जाता है।

इंस्टीट्यूट फार कम्पिटिटिवनेस के अध्यक्ष अमित कपूर ने कहा देश में बूढ़ी होती आबादी के निहितार्थ को समझने के लिए एक उचित निदान उपकरण के बिना, बुजुर्गों के लिए योजना बनाना नीति निर्माताओं के लिए एक चुनौती बन सकता है। वृद्ध व्यक्तियों के कल्याण और देखभाल के लिये हमें पहले से मौजूद सामाजिक समर्थन प्रणालियों/पारंपरिक सामाजिक संस्थानों जैसे- परिवार तथा रिश्तेदारी, पड़ोसियों से बेहतर संबंध, सामुदायिक संबंध व सामुदायिक भागीदारी को पुनर्जीवित करने पर ध्यान देना चाहिये और परिवार के लोगों को बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिये।