प्लेन क्रैश में बाल-बाल बचे, अब 45 साल बाद अपनों से मुलाकात…फिल्मी नहीं, सच है ये कहानी

मुंबई/कोल्लम: करीब 45 साल पहले 12 अक्टूबर 1976 की तारीख को दुबई से लौट रहा इंडियन एयरलाइंस का विमान क्रैश कर गया था। सभी 95 यात्री मारे गए थे। सज्जाद थांगल नामक शख्स को भी इसी फ्लाइट में सवार होना था लेकिन जरूरी काम की वजह से ऐन वक्त पर यात्रा रद्द करनी पड़ी। केरल के निवासी थांगल के कई परिचित हादसे का शिकार हो गए थे। उन्हें सदमा लग गया। लावारिस हाल में जिंदगी गुजर बसर कर रहे थांगल अब 70 साल की उम्र में अपने परिवार से मिलेंगे।

थांगल हादसे के बाद मुंबई लौट आए थे। यहां पनवेल में कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें सहारा दिया। सोशल एंड इवैन्जेलिकल असोसिएशन फॉर लव (SEAL) आश्रम के पादरी के. एम. फिलीप ने बताया, ’70 के दशक में सज्जाद थांगल दुबई और आबूधाबी में कार्यक्रम का आयोजन कराते थे। दक्षिण भारत की ऐक्ट्रेस रानी चंद्रा और अन्य लोग ऐसे ही प्रोग्राम में गए हुए थे। लौटते वक्त चंद्रा सहित अन्य लोगों की क्रैश में जान चली गई। थांगल के दोस्त सुधाकरन भी हादसे का शिकार हो गए।’

थांगल पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस का शिकार हो गए। उन्हें मानसिक समस्या हो गई। मुंबई में वह छोटे-मोटे काम जैसे कि वीजा और पासपोर्ट का फॉर्म भरना, कैटरिंग लाइन में नौकरी करने लगे। बूढ़े और बीमार इंसान के तौर पर 2019 में उन्हें शेल्टर होम में लाया गया। वह जल्द ही रिकवर हो गए और अपनी कहानी सुनाने लगे। आश्रम के लोगों ने केरल के कोल्लम जिले के शाशथमकोट्टा गांव में थांगल के परिजन के बारे में पता लगाया। वहां उनकी 91 साल की मां फातिमा बीबी और भाई-बहन हैं।

फोन पर सामाजिक कार्यकर्ताओं से बात करते वक्त थांगल की मां फातिमा फूट-फूटकर रो पड़ीं। उन्होंने बताया कि इतने सालों तक परिवार थांगल के लौटने का इंतजार करता रहा। पिता यूनुस का 2012 में निधन हो गया। वह केरल में लोगों की मदद करते रहे थे। गांव में थांगल की मां के अलावा तीन भाई और चार बहनें हैं। प्लेन हादसे के बाद परिवार को मृतकों की लिस्ट में थांगल का नाम नहीं मिला था। इससे उनके जिंदा रहने की उम्मीद थी।

थांगल ने बताया कि वह 1971 में गांव से दुबई गए थे। दुकान में काम करने के बाद वह भारत के लोगों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन करने लगे। विमान हादसे के बाद मुझे शॉक लग गया। मेरे पास पैसा भी अधिक नहीं था, जिससे कि वापस परिवार के पास जा सकूं। वहीं आश्रम के पादरी फिलीप ने बताया कि अगर थांगल यहां नहीं आए होते, तो शायद परिवार से मिले बिना ही निधन हो गया होता।