पेट्रोल-डीजल से कमाई कर कहां खर्च कर रही सरकार? गडकरी ने खोला राज

नई दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया है कि पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कहां हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल ढांचागत सुविधाओं के विकास के लिए और अन्य विकास कार्यों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी।

केंद्रीय मंत्री ने देश में ढुलाई और परिवहन की लागत पर पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के असर पर लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, ‘‘मौजूदा वित्तीय स्थिति के मद्देनजर इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य विकास कार्यों के लिए संसाधन जुटाने के उद्देश्य से पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क निर्धारित किये गये हैं।’’

गडकरी ने मंत्रालय एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल (petrol-diesel) की मूल्य वृद्धि का कुल परिवहन लागत पर असर 34 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क से परिवहन की लागत दूसरी कई चीजों पर भी निर्भर करती है। इनमें व्हीकल खरीदने पर लगी पूंजी, सैलरी, इंश्योरेंस, परमिट टैक्स, मेंटेनेंस, ईंधन, टोल टैक्स और अन्य खर्च शामिल हैं।

गडकरी ने कहा, “बाजार की स्थितियों और अतिरिक्त लागत बर्दाश्त करने की क्षमता के अनुसार ट्रांसपोर्ट कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं और नहीं भी डाल सकती हैं।” एक दूसरे सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कोरोना (Corona) के चलते लोकल लॉकडाउन की वजह से सामानों की सप्लाई और उपलब्धता पर असर पड़ा है।

पिछले कुछ महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। देश के ज्यादातर हिस्सों में पेट्रोल का भाव 100 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा हो गया है। डीजल की कीमतें भी 100 रुपये प्रति लीटर की तरफ बढ़ रही हैं। विपक्ष ने इसे लेकर सरकार पर दबाव बनाया है। विपक्ष का आरोप है कि जब कोरोना की महामारी से आम आदमी की आय पर असर पड़ा है तब सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ा रही है।