पुजारी ने अफगानिस्तान में मंदिर छोड़ने से किया इनकार, बोले: मुझे मौत का डर नहीं

नई दिल्ली। तालिबान (Taliban) के कब्जे के बाद अफगानिस्तान से अपनी जान बचाकर निकल रहे हजारों लोगों के बीच एक शख्स ऐसे भी हैं, जो अपना कर्तव्य छोड़कर कहीं नहीं जाना चाहते. रतन नाथ मंदिर में पुजारी पंडित राजेश कुमार (Pandit Rajesh Kumar) ने साफ कर दिया है कि वो मंदिर को छोड़कर नहीं जाएंगे. उनका कहना है कि अगर वो तालिबान के हाथों मारे जाते हैं, तो वो इसे सेवा समझेंगे. राजधानी काबुल पर कब्जे के बाद से ही अफगानिस्तान छोड़ने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है. हालांकि, तालिबान के बढ़ते प्रभाव के बाद से मई के अंत में ही लोगों का देश छोड़ने का दौर शुरू हो गया था.

अन्य लोगों की तरह ही राजेश कुमार से भी काबुल छोड़ने की अपील की गई थी. कई हिंदुओं ने उनकी यात्रा और रहने की व्यवस्था करने की भी पेशकश की थी. अपने ट्विटर हैंडल @BharadwajSpeaks पर भारद्वाज ने लिखा, ‘काबुल में रतन नाथ मंदिर के पुजारी पंडित राजेश कुमार ने कहा, ‘कुछ हिंदुओं ने मुझे काबुल छोड़ने की अपील की थी और मेरी यात्रा और रहने की व्यवस्था करने की पेशकश की थी. लेकिन मेरे पूर्वजों ने इस मंदिर की सैकड़ों वर्षों तक सेवा की है. मैं इसे छोड़कर नहीं जाऊंगा. अगर तालिबान मुझे मार देता है, तो मैं इसे अपनी सेवा समझूंगा.”

काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान में स्थिति और भी भयावह हो गई है. सोशल मीडिया पर अपनी जान बचाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के दिल दहला देने वाले वीडियो भी सामने आ रहे हैं. देश में करीब दो दशकों के बाद वापसी करते तालिबान के शासन की वापसी से डरे लोग अपनी जान दांव पर लगाने से पीछे नहीं हट रहे हैं. हाल ही में कुछ वीडियो सामने आए थे, जहां लोग सैन्य विमान पर लटककर बचने की कोशिश कर रहे थे.

विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा था कि भारत अफगानिस्तान में छोटे सिख और हिंदू समुदाय की भारत वापसी में मदद करेगा. बागची ने कहा था, ‘हम अफगान, सिख और हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ लगातार संपर्क में हैं. हम उन लोगों को भारत वापसी की सुविधा देंगे, जो अफगानिस्तान छोड़ना चाहते हैं.’ इससे पहले भी अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास की तरफ से भारतीय नागरिकों के लिए चार एडवाइजरी जारी की जा चुकी थीं.