पीएम मोदी का US दौरा: अमेरिका ने लौटाईं 157 कलाकृतियां तो पीएम ने जताया आभार

न्यूयॉर्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को अपना अमेरिका दौरा खत्म कर के भारत के लिए रवाना हुए। उनके साथ भारत से अवैध रूप से अमेरिका ले जाई गईं 157 कलाकृतियां भी भारत लौट रही हैं। 12वीं शताब्दी में बनी नटराज की सुंदर कांस्य प्रतिमा व 10वीं सदी के डेढ़ मीटर लंबे नक्काशी किए पैनल पर बने सूर्यपुत्र रेवंत की प्रतिमा जैसी देश के गौरवशाली अतीत का गवाह रहीं 157 प्राचीन कलाकृतियां भारत लौट रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका दौरे से लौटने से पहले ट्वीट में लिखा, “पिछले कुछ दिनों में हुई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें, अमेरिकी कंपनियों के सीईओ के साथ मुलाकात और यूएन में संबोधन जैसे कई परिणाम देने वाले कार्यक्रम हुए। मुझे विश्वास है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते आने वाले सालों में और ज्यादा मजबूत होंगे। हमारे बीच व्यक्ति से व्यक्ति के संपन्न रिश्ते हमारी सबसे बड़ी संपत्ति हैं।”

पीएम मोदी व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने संस्कृति से जुड़ी चीजों की चोरी, तस्करी रोकने के लिए सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय किया। कलाकृतियों में अधिकतर 10वीं से 14वीं शताब्दी की हैं, वहीं 45 कृतियां ईसा पूर्व यानी 2000 वर्ष पुरानी हैं। एक करीब वर्ष 2000 ईसा पूर्व यानी 4000 वर्ष पुरानी है।

मोदी ने इन अमूल्य वस्तुओं के लौटाए जाने पर अमेरिका का आभार जताया। कांसे की प्रतिमाओं में लक्ष्मी, नारायण, बुद्ध, विष्णु, शिव-पार्वती और 24 जैन तीर्थंकर प्रमुख हैं। कंकलामूर्ति, ब्रह्मी व नंदीकेस जैसे देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी हैं। हिंदू धर्म के चित्रांकनों में त्रि-शीश ब्रह्मा, रथ पर सवार सूर्य, विष्णु और उनके सहचारी, दक्षिणमूर्ति के रूप में शिव, नृत्यशील गणेश प्रमुख हैं। बौद्ध चित्रांकनों में बुद्ध, बोधिसत्व, मंजूश्री, तारा और जैन चित्रांकनों में जैन तीर्थंकर, पदमासन तीर्थंकर, जैन चौबीसी शामिल हैं। सामभंग, ढोल वादन करती महिला मानवाकृतियां भी हैं।

पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अमूल्य वस्तुओं की चोरी और तस्करी का मजबूती से मुकाबला करने की बात कही।नृत्य के स्वामी नटराज की चारभुजा कांस्य प्रतिमा अभय मुद्रा में है। इसमें शिव एक पांव से अज्ञानता भरे निरर्थक भाषण का प्रतीक अपस्मार पुरुष को कुचल रहे हैं। तमिलनाडु में बनी यह प्रतिमा पूर्ण रूप में आनंद तांडव को दर्शाती है।पश्चिमी भारत में निर्मित 12वीं शताब्दी की प्रतिमा में 24 तीर्थंकर विराजित हैं। महावीर सबसे मध्य में हैं और दो अन्य दोनों ओर। बाकी तीर्थंकर प्रभावती पर विराजित हैं।लोहे की खड्ग अपनी म्यान सहित प्रधानमंत्री मोदी के साथ भारत लौट रही है। इसे पंजाब में निर्मित माना जाता है और सिखों के छठवें गुरु हरगोविंद दास का नाम उत्कीर्ण है। यह 18वीं शताब्दी की है।12वीं शताब्दी की काले पत्थर की प्रतिमा में बौद्ध देवालय में दया की देवी तारा को दर्शाया गया है। सुंदर आभूषणों से सुसज्जित किया गया है।