पानी के साथ निकल रही आग, मिला कोल बेड मिथेन गैस का भंडार, बिजली-गैस किल्लत होगी दूर

हजारीबाग/रांची: झारखंड के हजारीबाग, बोकारो, धनबाद और रामगढ़ के कोयला खनन क्षेत्रों से कोलबेड मिथेन गैस का बड़ा भंडार मिला है। इस गैस के माध्यम से बिजली और रसोई गैस की किल्लत दूर हो सकेगी। हजारीबाग के बड़कागांव प्रखंड के हरली गांव स्थित सीमाही बागी टोला में भी हाल के दिनों में मिथेन गैस के बड़े भंडार का चला है। बताया गया है कि करीब दो साल पहले यहां कोयला का पता लगाने के लिए कराई गई बोरिंग से लगातार पानी के साथ आग भी निकल रही है। जिससे आसपास के इलाके में भय और दहशत का भी माहौल है।

करीब 722 बिलियन घन मीटर कोल बेड मिथेन का भंडार
देश का सबसे बड़ा कोल बेड मिथेन भंडार झारखंड में है। केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में सर्वाधिक 722.09 बिलियन घन मीटर कोल बेड मिथेन का भंडार मौजूद है। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) लिमिटेड की ओर से राज्य के कई कोल बेड मिथेन ब्लॉक के संचालन की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है। इनमें बोकारो, नॉर्थ कर्णपुरा और झरिया में अवस्थित मिथेन ब्लॉक शामिल है।

धनबाद, रामगढ़ और बोकारो में 16 लाख घन मीटर मिथेन गैस का भंडार मिलने के बाद ओएनजीसी की ओर से इन क्षेत्रों में करीब 300 कुएं खोदने का फैसला लिया गया है। इस गैस से हर साल लगभग 400 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो सकेगा। 20 लाख से अधिक परिवारों को एलपीजी के विकल्प के रूप में मिथेन गैस उपलब्ध कराई जा सकेगी। साथ ही औद्योगिक इकाईयों में भी ईंधन की समस्या कम होगी।

कोयला खदानों में मिलती है कोल बेड मिथेन गैस
मिथेन प्राकृतिक गैस है। यह जमीन की गहराई में पाई जाती है। खासतौर पर यह कोयला खदानों में मिलती है। इसे ही कोल बेड मिथेन कहते हैं। झारखंड में धनबाद, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग और चतरा जिले के कोयला खनन क्षेत्रों में इस गैस की बहुलता की संभावना है। मिथेन गैस अन्वेषण और संशोधन की प्रक्रिया को लेकर ओएनजीसी की ओर से आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।

ओएनजीसी की मांग पर राज्य सरकार की ओर से कोल बेड मिथेन गैस परियोजना को लेकर जमीन भी उपलब्ध कराई जा रही है। कई जिलों में जमीन उपलब्ध करा दी गई है और मांग के अनुरूप अन्य स्थानों के लिए भी जमीन उपलब्ध कराने की तैयारी हो रही है।

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