पत्नी जब करे सेक्स से इनकार… बेडरूम के अंदर की यह रिपोर्ट शर्मिंदा करती है

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र् की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया के 57 विकासशील देशों में आधी से ज्यादा महिलाओं को अपने पार्टनर के साथ सेक्स से इनकार करने की आजादी नहीं है। इसमें यह भी बताया गया है कि ये महिलाएं सेक्स के दौरान गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करने या स्वास्थ्य देखभाल की मांग भी नहीं कर सकती हैं। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UN Population Fund) की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ये डेटा दुनिया के लगभग एक चौथाई देशों को कवर करता है, जिसमें आधे से अधिक अफ्रीकी महाद्वीप से हैं।

सेक्स के लिए शारीरिक हिंसा का सहारा ले रहे पुरुष
इस रिपोर्ट में लाखों महिलाओं और लड़कियों के लिए शारीरिक स्थिति की भयावहता को बताया गया है, जो अपने अधिकारों की मांग तक नहीं कर सकती हैं। इन देशों में महिलाओं के साथ संबंध बनाने के लिए डर और शारीरिक हिंसा का भी सहारा लिया जाता है। यूएन पॉपुलेशन फंड ने कहा कि 57 देशों में केवल 55 प्रतिशत लड़कियां और महिलाएं यह तय करने में सक्षम हैं कि यौन संबंध बनाना है कि नहीं।

महिलाओं के मानवाधिकारों का हो रहा उल्लंघन
ये महिलाएं ही अपने पार्टनर से सेक्स के दौरान गर्भनिरोधक का उपयोग करना और सेक्सुअल या गर्भधारण के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की मांग करने में सक्षम हैं। इनके अलावा जितनी भी महिलाएं हैं, उनको यह आजादी नहीं मिली है। फंड की कार्यकारी निदेशक डॉ नतालिया कनेम ने कहा कि शारीरिक स्वायत्तता का इनकार महिलाओं और लड़कियों के मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन है। यह लैंगिक भेदभाव से उत्पन्न होने वाली असमानताओं और हिंसा को मजबूत करता है।

इन इलाकों में महिलाओं को बाकी जगहों से ज्यादा अधिकार
यूएन पॉपुलेशन फंड की इस रिपोर्ट का नाम My Body Is My Own है। इसमें बताया गया है कि पूर्वी और दक्षिण-पूर्व एशिया, लैटिन अमेरिका, कैरेबियन देशों में 76 प्रतिशत लड़कियां और महिलाएं सेक्स, गर्भनिरोधक और स्वास्थ्य देखभाल पर खुद निर्णय ले सकती हैं। जबकि, यह आंकड़ा अफ्रीका, मध्य और दक्षिण एशिया में 50 फीसदी से भी कम है।

इन तीन देशों में महिलाओं की स्थिति सबसे खराब
इस रिपोर्ट में क्षेत्रों के भीतर भी अंतर दिखाई देता है। जैसे- अफ्रीका के तीन देशों – माली, नाइजर और सेनेगल में महिलाओं की स्थिति सबसे खराब हैं। इन देशों में केवल 10 फीसदी महिलाएं ही सेक्स को लेकर खुद निर्णय कर सकती हैं। जबकि कई अन्य देशों में ऐसी महिलाओं का आंकड़ा थोड़ा ज्यादा है।

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