न किसान आंदोलन, न महंगे तेल की मार, सर्वे में बीजेपी की सरकार, विपक्ष सीमा से पार

नई दिल्‍ली. अगले साल सात राज्‍यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसे लेकर एबीपी न्यूज सी-वोटर का एक सर्वे आया है। सर्वे कितना सही या कितना गलत साबित होगा, यह तो भविष्‍य ही बताएगा। लेकिन, इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि फिलहाल भाजपा को टक्‍कर देने के लिए विपक्ष बिल्‍कुल तैयार नहीं है। सर्वे से पता चलता है कि लोगों का भाजपा पर भरोसा बना हुआ है। वहीं, यह विपक्ष के लिए खतरे की घंटी भी बजाता है। यह दिखाता है कि जिन्‍हें विपक्ष मुद्दा बनाती और समझती है, उसका लोगों पर खास असर नहीं है।

हाल के दिनों में किसान आंदोलन, कोरोना मैनेजमेंट, महंगे तेल, प्राइवेटाइजेशन और बेरोजगारी के मुद्दों को विपक्ष ने बार-बार उठाया है। यहां तक इनमें से कुछ मुद्दों को लेकर हाल का पूरा मॉनसून सत्र ही धुल गया। लेकिन, लगता है कि लोगों का परसेप्‍शन बदलने में विपक्ष पूरी तरह नाकाम रहा है। ताजा सर्वे तो फिलहाल यही बताता है। विश्‍लेषण देखकर ऐसा लगता है कि कोरोना मैनेजमेंट, तेल की महंगाई, प्राइवेटाइजेशन और बेरोजगारी को लेकर जनता में बहुत गुस्‍सा नहीं है। यूपी के संदर्भ में ही देखें तो जब एक सवाल किया गया कि सीएम योगी के कामकाज से कितना संतुष्ट हैं तो 44 फीसदी ने कहा कि वह बहुत संतुष्ट हैं, 18 फीसदी कम संतुष्ट हैं, 37 फीसदी असंतुष्ट हैं और एक फीसदी ने कहा कि वह कह नहीं सकते है।

UP

एबीपी न्यूज सी-वोटर ने पब्लिक मूड को जानने के लिए यह सर्वे किया। इसमें पांच राज्यों के चुनाव में किसकी कहां पर सरकार बन सकती है, किसे कितनी सीटें मिल सकती हैं, राज्य की जनता सीएम के बारे में क्या सोचती है, इसके बारे में भी बताया सवाल किए गए हैं। सर्वे में उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड और गोवा में बीजेपी की वापसी की बात कही गई है। मणिपुर में भी बीजेपी के शानदार प्रदर्शन के आसार हैं। दूसरी ओर पंजाब में लोग आप सरकार को देखना चाहते हैं।

UK

कांग्रेस से फिसल सकता है एक और राज्‍य
सर्वे में देश की सबसे पुरानी पार्टी के लिए एक और बुरी खबर है। राज्‍य में आम आदमी पार्टी (AAP) के आने के आसार जताए गए हैं। इसका साफ मतलब है कि कांग्रेस में कैप्‍टन अमरिंदर सिंह और प्रदेश पार्टी चीफ नवजोत सिंह सिद्धू की कलह का असर पड़ा है। दोनों ने काफी समय से एक-दूसरे पर तलवार खींच रखी है। पार्टी नेतृत्व ने कुछ हफ्तों पहले अमरिंदर सिंह के विरोध को नजरअंदाज करते हुए क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस प्रमुख बनाया था। लेकिन, अभी तक प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी खत्म नहीं हुई है। दोनों जिस तरह खुलकर लड़ रहे हैं, उससे साफ लगता है कि वे एक-दूसरे को सख्‍त नापसंद करते हैं। इसका खामियाजा पार्टी को अगले विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।

Punjab

एक के बाद एक सारे मुद्दे फेल
हाल में कांग्रेस की अगुवाई में कोरोना मैनेजमेंट, किसान आंदोलन से लेकर महंगाई और प्राइवेटाइजेशन सभी मुद्दों पर सरकार को घेरा गया। लेकिन, सर्वे के आंकड़े जिस तरह के हैं, उन्‍हें देखकर नहीं लगता है जनता भाजपा से नाखुश है। उसने इन सभी मुद्दों पर भाजपा को क्‍लीनचिट दी है। कोरोना के मैनेजमेंट और किसान आंदोलन सहित कुछ और मुद्दों को लेकर विपक्ष के हंगामे के कारण हाल में मॉनसून सत्र समय से पहले समाप्‍त कर दिया गया। किसी भी मुद्दे को लेकर खुलकर चर्चा नहीं हो पाई। शायद विपक्ष ने इस मौके को गंवा दिया। जब सदन में उसे सार्थक तरीके से जनता की आवाज उठानी चाहिए तो वह हंगामे में फंसा रह गया। इसमें भाजपा को कम ही नुकसान हुआ। अलबत्‍ता उसने सहानुभूति की बटोर ली और संसद न चल पाने का सारा का सारा दोष विपक्ष के सिर मढ़ दिया।

Manipur

प्राइवेटाइजेशन, बेरोजगारी और महंगाई बेअसर
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती महंगाई और नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (एनएमपी) प्रोग्राम को लेकर भी भाजपा के खिलाफ माहौल नहीं बन सका है। यह और बात है कि कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी इस मुद्दे को उठाते हुए बार-बार मीडिया के सामने आए हैं। सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर सरकार पर उनके हमले जारी हैं। वहीं, NMP के जरिये वह सरकार पर देश की मूल्‍यवान संपत्तियों को बेचने का आरोप लगाते रहे हैं। इसके तहत सरकार की रेलवे, बिजली से लेकर सड़क जैसे अलग-अलग इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर एसेट को बेचकर पैसा जुटाने की तैयारी है। इसके तहत छह लाख करोड़ रुपये के एसेट्स की बिक्री की जाएगी। यह बिक्री 4 साल में होगी। वित्‍त मंत्री ने बताया है कि एसेट्स के मोनेटाइजेशन (संपत्तियां बेचकर पैसा जुटाना) में जमीन की बिक्री शामिल नहीं है। यह मौजूदा संपत्तियों (ब्राउनफील्ड एसेट्स) की बिक्री से जुड़ा प्रोग्राम है। रोजगार पर भी सरकार से लोगों की नाराजगी नहीं दिखती है।