चीन ने गुपचुप तरीके से भारत में बनाई पकड़, बॉलीवुड-यूनिवर्सिटी में लगा रहा सेंध

नई दिल्ली: एक भारतीय थिंक-टैंक के अध्ययन से पता चला है कि चीन (China) ने भारत के फिल्म जगत, विश्वविद्यालयों, सामाजिक संस्थानों, थिंक-टैंक्स, सोशल मीडिया और तकनीकी उद्योग में वर्चस्व स्थापित करने और दखलअंदाजी करने के लिए भारी मात्रा में धन खर्च किया और चीन समर्थक खड़े किए हैं. इन सब से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है.

76 पन्नों की रिपोर्ट में खुलासा
नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक ‘लॉ एंड सोसाइटी एलायंस’ द्वारा जारी ‘मैपिंग चाइनीज फुट प्रिन्ट एंड इन्फ्लुएंस ऑपरेशन इन इंडिया’ शीर्षक वाली 76 पन्नों की अध्ययन रिपोर्ट यह दर्शाती है कि भारतीय संस्थानों में चीन की किस हद तक घुसपैठ हो चुकी है और आंकलन किया है कि भारत में चीनी पैठ कितनी गहरी और व्यापक है. रिपोर्ट में मनोरंजन जगत से लेकर शिक्षा क्षेत्र तक उन सभी क्षेत्रों का विस्तार से अध्ययन किया गया है, जिनमें चीनी खुफिया तन तंत्र और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने अपना प्रभाव स्थापित कर लिया है और दखलअंदाजी शुरू कर दी है. भारतीय उद्योगों और हर उस क्षेत्र, जहां चीन ने पिछले कई वर्षों में रणनीतिक रूप से निवेश के माध्यम से अपना प्रभाव बढ़ाया है. चीन ने भारत में आम आदमी और मतदाताओं की राय को प्रभावित करने के लिए अपने वर्चस्व को बढ़ाने के एजेंडे पर तेजी से काम किया है.

देश में अस्थिरता पैदा करना मकसद
प्रत्यक्ष और परोक्ष निवेश के माध्यम से, जैसा कि मनोरंजन उद्योग और कन्फ्यूशियस संस्थानों के मामले में देखा गया है, सामाजिक-राजनीति के क्षेत्र में प्रभाव के लिए बीजिंग कई तरह की चालें चल कर भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा है. इन सभी माध्यमों से अपने अनुकूल विमर्श चलाकर चीन भारत में कलह पैदा करना, भारतीय ताने-बाने को तोड़ना, और देश में अस्थिरता पैदा करना चाहता है.

बॉलीवुड को प्रभावित करने की कोशिश
पिछले कुछ वर्षों में, चीन ने बार-बार भारतीय मनोरंजन उद्योग में घुसपैठ करने और फिल्मों के सह-निर्माण के माध्यम से बॉलीवुड को प्रभावित करने की कोशिश की है. बॉलीवुड को प्रभावित करने के बीजिंग की चाल का सबसे स्पष्ट सबूत 2019 में बीजिंग अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में चीन-भारत फिल्म सह-निर्माण संवाद आयोजित करना था. भारतीय फिल्मों में चीनी प्रभाव इतना जबरदस्त है कि चीन ने सुनिश्चित किया कि शाहरुख खान और कबीर खान जैसे भारतीय सिनेमा दिग्गजों की भागीदारी फिल्म महोत्सव में हो.

बॉलीवुड में चीनी हितों का साधने का प्लान
रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि कैसे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने विशेष रूप से भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक भारतीय पैरवीकार (लॉबीस्ट) की अध्यक्षता में एक लॉबी समूह का गठन किया है. बीजिंग का प्रभाव सूक्ष्म लेकिन व्यवस्थित रहा है. भारत की फिल्म नियामक संस्थानों में चीन प्रमुख व्यक्तियों को अपने पक्ष में करने में कामयाब रहा है, जिससे उसने सुनिश्चित किया है कि बॉलीवुड में चीनी हितों को अच्छी तरह से साधा जाए और उसकी कारगुजारियों पर पर्दा डाला जा सके.

‘…उस वक्त देखा गया सबसे बड़ा सबूत’
इसका एक उदाहरण तब देखने को मिला जब फिल्म ‘रॉकस्टार’ के निर्माताओं को फिल्म के एक लोकप्रिय गाने के दौरान एक विशेष झंडे को धुंधला करना पड़ा, जिस पर ‘फ्री तिब्बत’ लिखा हुआ था. थिंक-टैंक्स और नागरिक समाज संगठनों के साथ जुड़ाव बीजिंग के खुफिया और परोक्ष ऑपरेशन केवल भारत के मनोरंजन उद्योग तक ही सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि वर्षों से चीन ने भारतीय थिंक-टैंक्स और नागरिक समाज को भी नियंत्रित करने और उन्हें चलाने की कोशिश की है. ऐसा करने के लिए, चीन ने अथक प्रयास किए हैं और भारत के बौद्धिक क्षेत्र में गहरी पैठ बनाने में सफल रहा है. जिन प्रमुख तरीकों से चीन ने थिक टैंक्स पर अपना बड़ा प्रभाव हासिल किया है, उनमें से दान के रूप में उन संस्थानों तक प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बड़ी मात्रा में धन पहुंचाना शामिल है.

खर्चा कर स्टूडेंट्स को कराई चीन की यात्रा
चीन नियमित रूप से थिंक-टैंक्स और विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच आदान-प्रदान कार्यक्रम (Exchange Program) की आड़ में भी अपने छद्म ऑपरेशन चलाता है. कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि भारतीय छात्र चीनी सरकार के खर्चे पर चीन की यात्रा करते हैं और अनजाने में बीजिंग के समर्थक बन जाते हैं और उसका प्रचार-प्रसार करने लगते हैं. अपने हित के अनुसार विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए चीन ने भारत में अब कई बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और सामाजि क संगठनों को या तो अपनेपक्ष में कर लिया है या उनकी पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने का काम कर रहा है.

भारत में बढ़ रही चीनी संस्थानों की संख्या
रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि भारत में चीनी संस्थानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और हाल के दिनों में दर्जनों भारतीय शिक्षण संस्थानों में चीन अध्ययन केंद्र स्थापित किए गए हैं. इसका व्यापक प्रभाव भारतीय संस्थानों के चीन समर्थक रुख अपनाने और मेधावी भारतीय छात्रों के चीन समर्थक बन जाने के रूप में देखा जा रहा है. भारत के शैक्षणिक संस्थानों में चीनी घुसपैठ का एक उदाहरण भारत के उत्तर-पूर्व में स्थित एक प्रमुख सार्वजनिक प्रबंधन विश्वविद्यालय में देखा गया है, जहां ‘अधिकारियों के लिए ग्रेजुऐशन कार्यक्रम (भारत और चीन में व्यवसाय का प्रबंधन)’ नामक कोर्स चलाया जा रहा है.

भारत में खोले कई ‘कन्फ्यूशियर इंस्टीट्यूट’
इसके तहत छात्रों को चीनी विश्वविद्यालयों में भेजा जाता है और प्रयास किया जाता है कि उनके में चीन के लिए सहानुभूति पैदा हो जाए. इसके अलावा, चीन ने भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में ‘कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट’ की स्थापना कर अपने प्रभाव का विस्तार किया है. 2004 से शुरू हुई इस योजना के तहत चीन यह दिखाता रहा है कि ये शिक्षा के केंद्र हैं, लेकिन वास्तव में ये चीन के सार्वजनिक प्रभाव का विस्तार करने के लिए उपयोग किया जाने वाले उपकरण के अलावा और कुछ नहीं है.

इंडियन मीडिया को भी किया प्रभावित
चीन भारतीय मीडिया का सामाजिक घुसपैठ के माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर रहा है. चीन ने भारत के नागरिक समाज को प्रभावित करने के लिए भारतीय मीडिया और प्रमुख मीडिया हस्तियों का उपयोग करने की कोशिश की है. दरअसल, यह उसकी प्रोपगैंडा रणनीति का केंद्र बिंदू है. लॉ एंड सोसाइटी एलायंस की रिपोर्ट द्वारा उजागर किए गए उदाहरणों में से एक ज्वलंत उदहारण पत्रकार राजीव शर्मा (Rajiv Sharma) का मामला है, जो चीन के लिए जासूसी करने के आरोपों का सामना कर रहे हैं.

सोशल मीडिया पर बना रहा रणनीति
भारत में तकनीक की समझ रखने वालेयुवा अपनी दिन-प्रतिदिन की जरूरतों के लिए मोबाइल ऐप को दिनचर्या का अहम हिस्सा बना चुके हैं. दुर्भाग्यवश चीनी प्रभाव की पहुंच इस क्षेत्र में भी हो चुकी है, जो विशेष रूप से कई समाचार ऐप्स को भी नियंत्रित करने लगा है. भारत में शीर्ष तीन समाचार ऐप को चीनी फर्मों से कई मिलियन अमेरिकी डॉलर का बड़ा निवेश प्राप्त हुआ है. बीजिंग वीडियो टूल्स सहित सोशल मीडिया और मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके भारतीय जनता के मन-मस्तिष्क को प्रभावि त करनेकी कोशिश कर रहा है.

IT सेक्टर में 7 अरब डॉलर का निवेश
तेजी से बढ़ते भारत का तकनीकी क्षेत्र भी चीन के चंगुल से नहीं बच पाया है. 2015 से चीन और चीनी कंपनियों ने भारतीय तकनीकी क्षेत्र में करीब 7 अरब डॉलर का निवेश किया है. कई अधिग्रहणों के साथ, चीनी कंपनियां भारत की कुछ सबसे बड़ी टेक कंपनियों की प्रमुख शेयर धारक बन गई हैं. रिपोर्ट द्वारा एक अन्य चिंताजनक बात यह उजागर की गई है की चीन की बड़ी दूरसंचार कंपनी उद्योगपतियों और नीति निर्माताओं के बीच शक्तिशाली रूप से अपनी पैठ जमा चुकी है. चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मोहरे के रूप में और विदेशी नागरिकों के खिलाफ जासूसी अभियान चलाने के लिए उसकी कंपनी की वैश्विक प्रतिष्ठा पहले ही धूमिल को चुकी है.

राजनीतिक संरक्षण से उठाया लाभ
किसी देश के लिए दूसरे राष्ट्र को प्रभावित करनेका सबसे आसान तरीका उस देश की राजनीति में प्रभाव कायम करना होता है. चीन का प्रभाव पिछले कुछ वर्षों में धीरे-धीरे भारत के राजनीतिक वातावरण में भी प्रवेश कर गया है. चीन ने पिछले कुछ वर्षों में कई भारतीय क्षेत्रों में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से व्यापक घुसपैठ की है. चीन न केवल भारत, बल्कि अपने पड़ोसियों और बड़े पैमाने पर दुनिया पर अपना प्रभाव बढ़ाने और दुष्प्रचार फैलाने के लिए सूक्ष्म और व्यापक रणनीति का उपयोग कर रहा है.