घाटी में बेगुनाहों की हत्या पर अमित शाह ने की उच्चस्तरीय बैठक, तत्काल कार्रवाई का दिया निर्देश

नई दिल्ली। घाटी में आतंकियों की ओर से बेगुनाहों की हत्या के मामलों ने केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है। हालात से निपटने और दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उच्च बैठक की। इस बैठक में घाटी के मौजूदा हालात की समीक्षा के साथ-साथ उससे निपटने की रणनीति पर विचार विमर्श किया गया। बैठक में अमित शाह के अलावा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजील डोभाल, गृह सचिव अजय भल्ला, आइबी प्रमुख अरविंद कुमार, बीएसएफ के महानिदेशक पंकज सिंह और सीआरपीएफ के महानिदेशक कुलदीप सिंह समेत गृहमंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार बैठक में अमित शाह को जम्मू-कश्मीर के ताजा घटनाक्रम की पूरी जानकारी दी गई। घाटी में आतंकियों ने पिछले सात दिनों में सात निर्दोष नागरिकों की हत्या की है। इसके साथ ही घटना में शामिल आतंकी माड्यूल और उनमें संलिप्त आतंकियों के बारे में खुफिया जानकारी साझा की गई। अमित शाह ने बैठक में साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर में नए सिरे से भय का माहौल खड़ा करने की आतंकियों के मंसूबे को किसी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए उन्होंने सभी जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया। उन्होंने साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर में आतंकियों और उन्हें संरक्षण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई के सुरक्षा एजेंसियों को खुली छूट है।

रोकी जाएगी सीमापार से ड्रोन से हथियार गिराने की कोशिश

बताया जाता है आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई और निर्दोष लोगों की हत्या को रोकने के लिए नई रणनीति पर भी चर्चा हुई। आतंकियों के ताजा हमलों के अलावा बैठक में सीमा पार से घुसपैठ, ड्रोन से हथियारों और ड्रग की सप्लाई और आतंकी फंडिंग रोकने के लिए उठाए गए कदमों की भी समीक्षा की गई। एजेंसियों का कहना था कि प्रमुख स्थानों पर एंटी ड्रोन तकनीक लगने से ड्रोन से हथियार और ड्रग सप्लाई काफी हद तक रोकने में सफलता मिली है। लेकिन नियंत्रण रेखा और सीमा के आसपास के इलाकों में ड्रोन से हथियार गिराने की कुछ घटनाएं सामने आई हैं। इन्हें रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।

हताश आतंकी बना रहे हैं निर्दोष और निहत्थे नागरिकों को निशाना बनाकर

सुरक्षा एजेंसियों का कहना था कि पिछले दो-तीन साल में उठाए गए कदमों से आतंकियों का मनोबल काफी नीचे है। बड़ी वारदात को अंजाम देने की उनकी तमाम कोशिशें विफल रही हैं। ऐसे में हताशा में वे निर्दोष और निहत्थे नागरिकों को निशाना बनाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और घाटी में असुरक्षा का माहौल बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना था कि आतंकी संगठन में शामिल होने वाले स्थानीय युवाओं की संख्या में भी भारी कमी देखी गई है।

जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ बढ़ी

उधर, अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ बढ़ गई है। 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद यह पहला मौका है, जब कश्मीर में आतंकी घुसपैठ में तेजी आई है। ईयू टुडे ने निक्केई एशिया के हवाले से प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया है कि जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने वाले ज्यादातर आतंकी पाकिस्तानी संगठन जैश-ए-मुहम्मद व लश्कर ए तैयबा से जुड़े हैं।

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रिपोर्ट के मुताबिक ये आतंकी अब तक अफगानिस्तान में तालिबान और उसके एक गुट हक्कानी नेटवर्क के लिए लड़ रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई से करीब 50 आतंकी जम्मू-कश्मीर में घुसे और अभी सक्रिय हैं। ये आतंकी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत व अफगानिस्तान के सीमावर्ती जनजातीय इलाकों से ताल्लुक रखते हैं। सेना और स्थानीय पुलिस का ध्यान इस ओर भी है। इसका मुकाबला करने के लिए रणनीति बनाई जा रही है। बीते दिनों अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद समेत कम से कम 12 आतंकी संगठनों के लिए पनाहगाह बना हुआ है।