घर में बिना मास्क के रहने से होता है 90% इंफेक्‍शन का खतरा, जरा सी लापरवाही से पूरी फैमिली हो सकती है पॉजिटिव


कोरोना वायरस की दूसरी लहरके बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने अब सभी लोगों से घर में भी मास्क लगाने को कहा है। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अब वो वक्त आ चुका है जब लोगों महामारी से पूरी तरह से बचाव के लिए अपने घरों में भी मास्क पहनना चाहिए। खास तौर से तब जब आपके घर में बुजुर्ग साथ रह रहे हों।

हेल्थ क्षेत्र से जुड़े जानकारों का भी यही मानना है कि वायरस को फैलने से रोकने के लिए अब एहतियात के तौर पर उठाए जाने वाले कदमों का दायरा और बढ़ाने की जरूरत है। क्योंकि लोगों की बिना वजह की अफरातफरी से कोविड की महामारी तेजी से फैल रही है और लाभ की बजाए जोखिम उठाना पड़ रहा है। स्वास्थ से जुड़े लोगों ने घर में मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की वजह और इसके उल्लघंन के दुष्प्रभाव से भी आगाह किया है।

अब सभी के मन में ये भी सवाल आता है कि आखिर स्वास्थ्य अधिकारियों ने घर पर मास्क पहनने के लिए क्यों कहा? तो बता दें कि सरकार की ओर की गई इस अपील का एकमात्र ही लक्ष्य है कोरोना की ट्रांसमिशन चेन को ब्रेक करना। कम्युनिटी हेल्थ डिपार्टमेंट द्वारा किए गए स्टडी से पता चला है कि पिछले साल 56 फीसदी लोगों ने अपने परिवार के लोगों को संक्रमित किया था।

यह बीमारी मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति से निकलने वाली श्वसन बूंदों के माध्यम से दूसरों लोगों में फैलती है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता है, छींकता है, बातचीत करता है, चिल्लाता है, या फिर गाता तो उससे निकली श्वसन बूंदें हवा में घुल जाती हैं। ऐसे में यह Aerosol के जरिए स्वस्थ्य लोगों के मुंह और नाक में प्रवेश कर जाता है। यही वजह है कि अब घर में भी आपको 6 फीट दूरी रखने के साथ-साथ मास्क पहनना जरूरी है।

जो लोग घर में अपने परिवार के सदस्यों से बिना मास्क पहने हुए जोर-शोर से बातचीत करते हैं वे संक्रमण को न्यौता दे रहे हैं। ऐसे में आप खुद ही अपने पूरे परिवार की कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट के जिम्मेदार हैं।

जब आपके परिवार के ज्यादातर लोग अंदर ही हैं तो कोरोना प्रोटोकॉल को फॉलो करना जरूरी है। मास्क का उद्देश्य सिर्फ पहनना ही नहीं बल्कि दूसरे लोगों की कोविड -19 से सुरक्षा करना भी है।

घर पर मास्क पहनकर आप अपने बड़े-बुजुर्गों जैसे दादा-दादी, नाना-नानी, पेरेंट्स का भी कोरोना वायरस से बचाव कर सकते हैं। भले ही आपके घर का कोई एक सदस्य कोविड पॉजिटिव क्यों न हो लेकिन अगर बाकी लोग मास्क पहनते हैं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हैं तो आप काफी हद महामारी से बाकी पूरे परिवार का बचाव कर सकते हैं।
घर में जब दो लोग रहते हों और दोनों मास्क पहनते हों तब कोविड का जोखिम 1.5 प्रतिशत जोखिम रहता है। वहीं जब अगर घर के किसी एक संक्रमित सदस्य ने मास्क पहना हो और बाकियों ने नहीं तो 5 फीसदी तक रहता है। लेकिन अगर परिवार के किसी कोविड पॉजिटिव मरीज ने मास्क नहीं पहना और सभी स्वास्थ्य लोगों ने पहना हो तो खतरा 30 फीसदी तक रहता है। इससे इतर 90 फीसदी कोविड का खतरा तब होता है जब न संक्रमित व्यक्ति ने मास्क पहना हो और न ही परिवार के बाकी सदस्यों ने।

केंद्रीय संयुक्त स्वास्थ्य सचिव लव अग्रवाल ने हाल ही में मास्क नहीं लगाने से होने वाले खतरे के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि अगर व्यक्ति मास्क नहीं लगाता है और गाइडलाइन का पालन नहीं करता है तो कोरोना संक्रमण का खतरा 90 फीसदी तक बढ़ सकता है। मास्क लगाने से और गाइडलाइन का पालन करने से यह खतरा 30 फीसदी तक कम हो सकता है।

नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्य डॉ. वीके पॉल (Dr VK Paul) ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन नहीं करता तो वह 30 दिन में 406 लोगों को संक्रमित कर सकता है। वहीं अगर संक्रमित व्यक्ति की गतिविधि 50 फीसदी तक थम जाए तो इस ड्यूरेशन में वो केवल 15 लोगों तक अपना संक्रमण फैला सकता है।

जबकि अगर कोविड पॉजिटिव रोगी की एक्टीविटी यदि 75 प्रतिशत तक कम होती है तो वह 30 दिनों में महज 2.5 लोगों को संक्रमित कर पाएगा। इसलिए घर में सोशल डिस्टेंसिंग जरूर है।

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