कोरोना तबाहीः एक चिता पर जलाई जा रहीं 5-5 लाशें, देखकर फट जायेगा कलेजा

अहमदाबाद। सूरत के एक श्मशान घाट में बुधवार की रात, एक ही चिता पर पांच लाशें जलाई गईं, ताकि घंटों दाह संस्कार का इंतजार कर रही लाशों की संख्या को कम किया जा सके। यह सिर्फ गुजरात में ही नहीं, पूरे गुजरात के श्मशान घाटों का यही हाल है। श्मशान घाट 24 घंटे सुलग रहे हैं, फिर भी लाशों की कतारें नहीं घट रही हैं। अधिकांश मौतें कोरोना वायरस के कारण हो रही हैं। हैरानी वाली बात है कि कोरोना वायरस से मौत के बाद श्मशान पहुंच रहीं लाशों की संख्या और आधिकारिक आंकड़ों में जमीन आसमान का अंतर है।

चार प्रमुख शहरों सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद और राजकोट के नगर निगमों द्वारा जारी किए गए बुलेटिन के आंकड़े देखें तो रोज महज 25 मौतों का दावा किया जा रहा है जबकि मृत्युदर इससे कहीं ज्यादा है।

7 से 15 में अप्रैल से बीच 90 मौत
मध्य गुजरात के सबसे बड़े अस्पताल वडोदरा के एसएसजी अस्पताल में पिछले नौ दिनों में कोविड आईसीयू में कम से कम 180 लोगों की मौत हुई। भरुच में 8 दिनों में 260 कोविड मरीजों की मौतें हुईं और यहां आधिकारिक आंकड़ों में सिर्फ 36 कोरोना मौतें दर्ज हैं। वडोदरा के एक अन्य प्रमुख अस्पताल, GMERS मेडिकल कॉलेज और अस्पताल गोत्री के आंकड़े देखें तो कोविड आईसीयू में अकेले 7 अप्रैल से 15 अप्रैल तक 90 मौतें हुई हैं, जबकि चौथी और पांचवीं मंजिल पर आईसीयू में रोजाना कम से कम 15 लोग दम तोड़ रहे हैं।

10 श्मशान घाटों में 100 शवों का दाह संस्कार
वडोदरा के इन दोनों सरकारी अस्पतालों में अकेले एक सप्ताह में 350 लोगों की मौत हुई। भरूच के श्मशान घाट का रजिस्टर देंखें तो एक हफ्ते में 260 कोरोना से मरे लोगों का दाह संस्कार किया गया जबकि जिले में आधिकारिक मौत 36 ही दर्शाई गई हैं। नर्मदा नदी के तट पर दाह संस्कार करने वाले धर्मेश सोलंकी ने कहा, ‘पिछले एक सप्ताह से, रोज 22-25 कोरोना मौतों के शवों का दाह संस्कार हो रहा है। हर दिन लगभग 7,500 किलोग्राम लकड़ी की सप्लाई हो रही है। अहमदाबाद में बीते चार दिनों में 10 श्मशान घाट में लगभग 100 शवों का दाह संस्कार हो चुका है।

तीन नए श्मशान किए गए शुरू
सूत्रों की मानें तो बीते एक हफ्ते से हर रोज कम से कम 50 कोरोना मरीजों के शव उनके परिजनों को दिए जा रहे हैं। दो दिनों में तो यह आंकड़ा सौ का हो गया है। राजकोट जिले ने भी 8 अप्रैल से 14 अप्रैल तक कोविड अस्पतालों में 298 से अधिक मौतें हुईं लेकिन कागजों में सिर्फ 57 मौतें दर्ज हैं। गुरुवार को राजकोट में 82 अन्य लोगों ने दम तोड़ा। सूरत के दो बड़े श्मशान घाटों में 5 अप्रैल से 13 अप्रैल तक रोज लगभग 80 दाह संस्कार हुए। यहां तीन नए श्मशान भी शुरू किए गए हैं। नवनिर्मित पाल श्मशान में प्रतिदिन कम से कम 20 शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

लंबी चिता लगातार एक साथ हो रहा दाह संस्कार
सूरत नगर निगम ने गुरुवार को जो आंकड़े जारी किए उसमें 25 मौतें दिखाई गईं। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा, ‘यह सच है कि सरकारी आंकड़ों में कोरोना की मौतें कम दिखाई जा रही हैं।’ सूरत में, एक बार में पांच शवों को जलाने के लिए 18 फीट लीबे और आठ फीट चौड़ी चिता बनाई गई है। इसमें एक साथ शवों को फीट की दूरी पर रखकर जलाया जा रहा है।

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