एक मुसलमान ने ही उडा दी पूरी मस्जिद, उड गये 100 नमाजियों के चिथडे-चिथडे, वजह कर देगी हैरान

काबुल। एक दिन पहले तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा था कि आईएसआईएस तालिबान के सामने कोई खतरा नहीं है, बल्कि वो सिर्फ एक सिरदर्द है और जबीहुल्लाह मुजाहिद के बयान के चंद घंटों बाद जुम्मे की नमाज पढ़ते वक्त मस्जिद के अंदर तबाही मचाने वाला धमाका होता है और 100 से ज्यादा लोग उड़ा दिए जाते हैं। तो क्या अफगानिस्तान के निवासियों के नसीब में सिर्फ मरना ही लिखा है। आईएसआईएस ने ना सिर्फ इस घटना की जिम्मेदारी ली है, बल्कि हमलावर की पहचान एक उइगर मुस्लिम के तौर पर की गई है।

जानकार बताते हैं कि तालिबान जिस तरह के ऑपरेशन अफगानिस्तान में चला रहा था, अब उसी तरह के ऑपरेशंस आईएसआईएस-के चला रहा है। तालिबान भी अफगानिस्तान के बाजारों में धमाके करता था, मस्जिदों में धमाके करता था, सरकारी अधिकारियों को मारता था और वही काम आईएसआईएस-के के आतंकी कर रहे हैं। कुंदुज शहर के एक मस्जिद में हुए आतंकी हमले में शिया मुसलमानों को निशाना बनाया गया है और हमले की जिम्मेदारी लेते हुए आईएसआईएस-के की तरफ से कहा गया है कि, उनका काम शियाओं को मारना है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने अफगानिस्तान के कुंदुज शहर में एक शिया मस्जिद पर हुए भीषण हमले की निंदा करते हुए कहा है कि, हमले नागरिकों को निशाना बनाकर किया गया था। गुटेरेस ने अपने प्रवक्ता द्वारा जारी एक बयान में कहा कि, ‘अपराधियों को न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए।’
यूनाइटेड नेशंस के महासचिव ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। हमले की जिम्मेदारी स्थानीय इस्लामिक स्टेट आतंकवादियों ने ली है, जिसे इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (आईकेएसपी) के नाम से जाना जाता है। इस विस्फोट में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है और करीब 20 लोग घायल हो गए हैं।

इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने साफ तौर पर कहा है कि, उनके निशाने पर सिर्फ शिया मुसलमान हैं। इस्लामिक स्टेट खुरासन के आतंकी पहले भी सुन्नी बहुल अफगानिस्तान में शिया मुस्लिम समुदाय को निशाना बना चुका है। आईएसकेपी के आतंकवादियों ने पिछले महीने काबुल हवाई अड्डे पर घातक हमला किया, जिसमें 13 संयुक्त राज्य के सैन्यकर्मी और 169 अफगान नागरिक मारे गए थे। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन, UNAMA ने ट्वीट किया है कि वह हाल के हमलों के इजाफे से चिंतित है, जिसमें शुक्रवार को सैय्यदाबाद मस्जिद पर बमबारी के अलावा, काबुल में एक मस्जिद के पास रविवार को आईएसकेपी द्वारा दावा की गई घटना और बुधवार का हमला शामिल है। वहीं, खोस्त में एक स्कूल पर भी आईएसकेपी के आतंकियों ने हमला किया था, जिसके बाद से अब स्कूल पूरी तरह से बंद हो चुका है।

अफगानिस्तान में हमले होना और हमले की निंदा पूरी दुनिया के द्वारा किया जाना, कोई नई बात नहीं है। जब तक तालिबान देश की सत्ता से बाहर रहा, उसने हजारों बेगुनाहों को धमाकों में उड़ा दिया और अब जबकि आईएसकेपी के साथ तालिबान के विचारधारा में थोड़ा अंतर आ गया है, तो आईएसकेपी वही काम कर रहा है, जो तालिबान पिछले दो दशक से करता आया है। यूनाइटेड नेशंस द्वारा समर्थित यूनाइटेड नेशंस असिस्टेंस मिशन इन अफगानिस्तान यानि (UNAMA) ने इस धमाके की निंदा की है और आतंकियों से आह्वान किया है, कि बेगुनाहों को नहीं मारा जाए और सभी संगठन बातचीत के मेज पर आएं। आतंकियों से अपील की गई है, कि कोई शिया है, तो उसे मार देना कहां तक सही है? किसी को मजहब के आधार पर मारना गलत बात है। लेकिन, क्या आतंकियों को इन बातों से मतलब है? अगर आतंकियों के दिल में दर्द और आंखों में पानी होता, तो क्या वो बेगुनाहों को मारते।

वहीं, अमेरिका ने मस्जिद पर हुए भीषण आतंकी हमले की निंदा की है, जिसमें सौ से ज्यादा लोग मारे गये हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि, ‘संयुक्त राज्य अमेरिका अफगानिस्तान के कुंदुज में जुमे की नमाज के दौरान उपासकों पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता है। हम पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।’प्राइस ने कहा, ‘अफगान लोग आतंक मुक्त भविष्य के हकदार हैं।’ अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी से संकेत मिलता है कि मस्जिद के अंदर एक आत्मघाती विस्फोट में 100 से अधिक लोग मारे गए और घायल हो गए।

शुक्रवार को जिस मस्जिद पर आत्मघाती हमला किया गया है, उस मस्जिद में हजारा समुदाय के लोगों का है, जिन्हें पिछले कई सालों से सुन्नी आतंकी गुट निशाना बनाते आए हैं। इस मस्जिद का नाम गोजर-ए-सैयद अबाद मस्जिद था और चश्मदीदों ने बताया है कि जब लोग नमाज पढ़ रहे थे, उसी वक्त भयानक धमाका हुआ था। एक चश्मदीद ने बताया कि, नमाज शुरू होने के साथ ही विस्फोट हो गया था और उस वक्त मस्जिद में काफी भीड़ थी। प्रमुख शिया धर्मगुरु सैय्यद हुसैन अलीमी बल्खी ने इस हमले की निंदा की है और तालिबान से अपील की है, कि वो शियाओं की रक्षा के लिए कदम उठाए।