इस महिला की आईडी देखते ही तालिबान के लड़ाके ने मारी थी 8 गोली, फिर किया इतना गंदा कांड

काबुल। अफ़गानिस्तान पर कब्जा कर तालिबान ने अफगानिस्तान में ख़ूब खून-खराबा मचा रखा है. तालिबान के लड़ाके अफगानिस्तान के लोगों को ज़रा भी बख्श नहीं रहे हैं. हालत इस क़दर बिगड़ चुके हैं कि राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी अहमदज़ई तो देश छोड़कर ही भाग गए हैं. खबरों के मुताबिक, अशरफ़ ग़नी अहमदज़ई ने पड़ोसी देश ताजिकिस्तान में शरण ले ली है. वहीं अफ़गानी लोग भी दूसरे देशों से मदद की गुहार लगा रहे हैं और यहां-वहां भाग रहे हैं.

बता दें कि, तालिबान एक इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन है. तालिबान ने अफ़गानिस्तान पर ऐसा कहर ढहाया है कि जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. इसी के साथ अफ़ग़ानिस्तान में महिला अधिकारों को लेकर भी चर्चा जोर-शोर से हो रही है. पुरुषों के साथ ही अफ़गानिस्तान में महिलाओं की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है.

तालिबान ने अफ़गानी महिलाओं पर भी ख़ूब कहर बरपाया है और यह सिलसिला जारी है. लगातार महिलाओं के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा की खबरें भी आ रही हैं. ऐसे में भारत में रह रही एक महिला की उस कहानी के बारे में हम आपको बताएंगे जो कभी अफ़गानिस्तान में रहती थी और वो भी तालिबान की क्रूरता की शिकार हो चुकी है.

यह कहानी है एक 33 साल की महिला खटेरा की. खटेरा बताती है कि साल 2020 में उसे एक तालिबानी लड़ाके ने मौत के घाट उतारने का मन बना लिया था हालांकि वो खुद को भाग्यशाली मानती है कि वो बच गई. खटेरा के मुताबिक़, उसके पिता और तालिबानी लड़ाके ने उसके ऊपर के हिस्से में 8 गोलियां मारी थी. वहीं उसकी आंखों तक को निकाल लिया गया था.

इस महिला को उस समय तालिबान ने अपना शिकार बनाया था जब वो गर्भवती थी. उसकी आंखें फोड़ दी गई थी. न ही उसके और न ही उसके होने वाली बच्चे के बारे में कुछ सोचा गया. इस महिला के साथ क्रूरता अफगानिस्तान के गजनी प्रांत में की गई थी. खटेरा बताती है कि, आतंकी महिलाओं को कुत्तों से कटवाते हैं. उसे अफ़गानिस्तान की महिलाओं की चिंता सता रही है. उसे यह समझ नहीं आ रहा है कि महिलाओं का भविष्य क्या होगा.

खटेरा कहती है कि जब वो किसी काम के सिलसिले में घर से बाहर जा रही थी तब ही तालिबान के लड़ाकों ने उन्हें रोक कर घेर लिया था. लड़कों ने उसकी आईडी देखी और फिर उस पर गोलियां बरसा दी. वो कहती है कि तालिबान महिलाओं को मांस समझता है. तालिबान महिलाओं को मरा हुआ मानता है. कभी-कभी हमारे शरीर को कुत्तों को खिलाया जाता है. तालिबान न महिलाओं को पढ़ने देता है और न ही नौकरी करने देता है. वहीं तालिबान महिलाओं को पुरुष डॉक्टरों के पास भी जाने नहीं देता है. बता दें कि, अब खटेरा दिल्ली में अपनी बेटी के साथ रहती है.