अभी अभीः पेट्रोल-डीजल पर देश के लिये आई सबसे बडी खुशखबरी, जानकर झूम उठेंगे आप

नई दिल्‍ली। Petrol की डिमांड अगस्‍त में अचानक बढ़ गई है। कहा यह जा रहा है कि इस दौरान जहां पेट्रोल की खपत में बढ़ोतरी जारी रही, वहीं डीजल की मांग घट गई। सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों के आंकड़ों के मुताबिक पेट्रोल की बिक्री पहले ही महामारी-पूर्व के स्तर पर पहुंच चुकी है। हालांकि आम लोग तेल की कीमतों से परेशान हैं। जानकारों की मानें तो डिमांड बढ़ना New Normal में आम जिंदगी के एडजस्‍ट होने का संकेत है लेकिन ऊंची कीमतों से लोग प्रभावित हो रहे हैं।

इस बीच, एक अच्‍छी खबर यह आ रही है कि भारत का पुराना दोस्‍त Russia क्रूड का उत्‍पादन बढ़ाने को सहमत है। उसने तेल उत्‍पादक देशों के साथ बैठक में कच्‍चे तेल का उत्‍पादन बढ़ाने की बात कही है। इससे सबसे ज्‍यादा मदद भारत को होगी क्‍योंकि हम अपनी जरूरत का 80 फीसद तेल आयात करते हैं। उत्‍पादन बढ़ने से कच्‍चा तेल सस्‍ता होगा, जिसका सीधा असर यहां Petrol-Diesel की कीमतों पर पड़ेगा।

Indian Oil समेत दूसरी कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार, इन्‍होंने अगस्त में 24.3 लाख टन पेट्रोल बेचा। यह एक साल पहले की समान अवधि से 13.6 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही पेट्रोल की बिक्री का आंकड़ा महामारी-पूर्व के स्तर को पार कर चुका है। अगस्त, 2019 में पेट्रोल की बिक्री 23.3 लाख टन रही थी।

उधर, Russia के साथ तेल निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) ने धीरे-धीरे कच्‍चा तेल उत्पादन बढ़ाने को लेकर सहमति जताई है। इसका कारण कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित वैश्विक अर्थव्यवस्था में पुनरुद्धार और ईंधन मांग में तेजी आना है। तेल निर्यातक देशों के संगठन और सहयोगी देशों को ओपेक प्लस (Opec+) के नाम से जाना जाता है।

इन देशों ने Virtual Meeting एक अक्टूबर से प्रतिदिन 4,00,000 बैरल तेल उत्पादन जोड़ने की पहले की योजना पर सहमति जताई। ओपेक और सहयोगी देशों ने पिछले साल Lockdown और यात्रा पाबंदियों के कारण ईंधन की मांग में कमी को देखते हुए उत्पादन में कटौती की थी। वे अब धीरे-धीरे उत्पादन में कटौती को समाप्त कर रहे हैं।

बुधवार को तेल की कीमत न्यूयार्क मर्केन्टाइल एक्सचेंज में 1.6 प्रतिशत घटकर 67.40 डॉलर प्रति बैरल रही। वहीं वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड 1.4 प्रतिशत घटकर 70.67 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।