अभी अभीः अमित शाह से मिलने उनके घर पहुंचे कैप्टन अमरिंदर सिंह, अंदर से आई ये बडी खबर

नई दिल्ली। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री गृह मंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे हैं। शाह के घर पर दोनों नेताओं की मुलाकात हो रही है। कैप्टन के भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। इस मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि अमरिंदर को भाजपा मोदी कैबिनेट में मंत्री बनाने का ऑफर दे सकती है।

भाजपा को क्या फायदा होगा?

1-सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भाजपा को पंजाब में एक बड़ा चेहरा मिलेगा। अमरिंदर सिंह प्रदेश के कद्दावर नेता माने जाते हैं। 2017 तक भाजपा वहां शिरोमणि अकाली दल के साए में  चुनाव लड़ रही थी। साल 2017 के विधानसभा चुनावों और फिर 2019 के लोकसभा चुनावों में भी अकाली दल के खराब प्रदर्शन के बावजूद भाजपा ने उससे रिश्ता नहीं तोड़ा। था लेकिन जब कृषि कानूनों के विरोध में अकाली नेता और सुखविंदर सिंह की पत्नी हरसिमरत कौर ने मोदी सरकार से इस्तीफ़ा दे दिया और समर्थन वापस ले लिया तो फिर दोनों के रास्ते अलग हो गए।

2- कांग्रेस को कमजोर करने के लिए अमरिंदर सिंह अपनी पूरी ताकत लगा देंगे। अब अमरिंदर और भाजपा के हित एक हो जाएंगे। पार्टी को लगता है कि कैप्टन के जुड़ जाने से पार्टी को पंजाब में अपने पांव मजबूत करने मे मदद तो मिलेगी ही, साथ ही कांग्रेस पर प्रहार और वार करना आसान होगा। कैप्टन पंजाब में कांग्रेस का मुख्य चेहरा रहे हैं और पार्टी ने पिछला विधानसभा चुनाव उन्हीं के चेहरे पर लड़ा था।

3-पंजाब में भाजपा को एक बूस्ट मिलेगा। 2017 के विधानसभा  चुनाव में जहां अकाली दल ने 15 सीटें जीती थीं वहीं भाजपा को केवल तीन सीटें मिली थीं। जबकि अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में चुनाव लड़ने पर कांग्रेस ने 117 में से 77 सीटें जीती थीं। जबकि आम आदमी पार्ट ने 19 सीटें जीती थीं। जहां 2017 के चुनाव में भाजपा में रेस में एकदम पीछे थी, अमरिंदर के भाजपा में शामिल होने से पार्टी का पलड़ा भारी हो सकता है।

4-कैप्टन भाजपा की राष्ट्रवादी छवि की मापदंड पर फिट बैठते हैं और उन्हें अपने साथ लेने से पार्टी की ताकत बढ़ सकती है।

5- कैप्टन अपने रसूख का फायदा उठाकर करीब 10 महीने से चल रहे किसान आंदोलन को खत्म कराने का एक जरिया बन सकते हैं। वे सरकार और किसानों के बीच इस आंदोलन को खत्म कराने की एक कड़ी का काम कर सकते हैं।

 

कैप्टन अमरिंदर सिंह – फोटो : पीटीआई
कैप्टन का क्या फायदा होगा

1-सूत्रों ने बताया यदि कैप्टन अमरिंदर सिंह भाजपा में शामिल होते हैं तो वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में शामिल किए जा सकते हैं। वे कृषि मंत्री बनाए जा सकते हैं।

2- साथ ही पंजाब में भाजपा का मुख्यमंत्री चेहरा बनाए जा सकते हैं। पार्टी उनके नेतृत्व में ही चुनाव लड़ने की घोषणा कर सकती है।

3- कैप्टन मानते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व ने उनका अपमान किया और उन्हें इस तरह के अपनानजनक विदाई की उम्मीद नहीं थी। ऐसे में अमरिंदर जरूर कांग्रेस से अपना राजनीतिक बदला लेने की कोशिश करेंगे और इस काम में भाजपा जैसी देश की सबसे बडी पार्टी उनके लिए एक बेहतर प्लेटफॉर्म साबित हो सकती है। यदि नवजोत सिंह सिद्धू आगामी चुनाव तक कांग्रेस में सक्रिय रहते हैं तो सिद्धू को सीएम बनने से रोकना उनका पहला लक्ष्य होगा।

एक ‘शर्त’ बहुत है चर्चा में
लेकिन यह सब हो उससे पहले एक शर्त की चर्चा हो रही है जिस पर भाजपा नेतृत्व को विचार करना है। सूत्रों का कहना है कि अमरिंदर सिंह भाजपा नेतृत्व से किसान आंदोलन का कोई स्थायी हल निकालने पर विचार करने को कह रहे हैं। स्थायी हल के तौर पर आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर या तो कृषि कानून को वापस लिया जाए या फिर एमएसपी को कानूनी दर्जा देकर बीच का एक ऐसा रास्ता निकालने की बात की जा रही है। जो केंद्र और किसान संगठनों के बीच कटुता को कम कर दे और किसान आंदोलन खत्म करने पर सहमत हो जाएं। ऐसे में यदि किसान आंदोलन खत्म हो जाता है तो इसका श्रेय अमरिंदर सिंह को दिया जाए।

अमित शाह के साथ कैंप्टन अमरिंदर सिंह – फोटो : PTI (File Photo)
तीन केंद्रीय कृषि कानूनों की वजह से कृषि प्रधान राज्य में हाशिये पर चली गई भगवा पार्टी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक प्रासंगिकता हासिल करने की कोशिश कर रही है। इसलिए इस शर्त के पीछे कैप्टन गुट का यह कहना है कि यदि भाजपा पंजाब में चुनाव जीतना चाहती है तो किसान आंदोलन को लेकर कोई स्थायी हल निकालना ही होगा और यदि मुद्दा लेकर पार्टी चुनाव में उतरे तो इसके सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

सूत्रों ने यह भी बताया कि यदि भाजपा नेतृत्व किसान आंदोलन को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं देता है तो फिर कैप्टन ने अपनी अलग पार्टी बनाने के विकल्प को खुला रखा है। हालांकि भाजपा में उनके शामिल होने की अटकलों के बावजूद,  पार्टी के भीतर एक वर्ग का मानना है कि तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए वे जिस तरह के प्रबल समर्थक रहे हैं यही बात उनके पार्टी में शामिल होने के आड़े आ सकती है।

अपनी पार्टी बनाने की चुनौतियां क्या
यदि अमरिंदर सिंह अपनी पार्टी बनाते है तो उसके सामने कई चुनौतियां हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि अब जबकि पंजाब चुनाव में मुश्किल से चार-पांच महीने बचे हैं ऐसे में इतनी जल्दी संगठन बनाना और उसे मजबूत करना मुश्किल भरा काम हो सकता है। यदि वे इस चुनाव में भी अपना एक और राजनीतिक पारी खेलना चाहते हैं तो उन्हें एक मजूबत संगठन की जरूरत पड़ेगी। राज्य में मजबूत संगठन अकाली दल का है लेकिन वे अकाली दल में जाने का विकल्प इसलिए नहीं चुन सकते क्योंकि वहां सुखबीर सिंह बादल मुख्यमंत्री पद के मुख्य चेहरे हैं। इसलिए मौजूदा हालात में भाजपा में शामिल होना कैप्टन के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है।