अब खुल जाएंगे सिंघु और गाजीपुर बॉर्डर? हाइवे जाम पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का संकेत समझिए

नोएडा। द‍िल्‍ली से सटे यूपी के गाज‍ियाबाद, नोएडा समेत एनसीआर के लोगों के ल‍िए राहत भरी खबर है। क‍िसान आंदोलन के चलते काफी समय से बंद द‍िल्‍ली बॉर्डर के हाइवे जल्‍द खुल सकते हैं। क्‍योंक‍ि दिल्ली एनसीआर बॉर्डर को प्रदर्शनकारी किसानों की ओर से लगातार जाम किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। साथ ही कहा है क‍ि कैसे हाइवे रोजाना जाम किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह कार्यपालिका की ड्यूटी है कि वह सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए कानून पर अमल कराए।

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी गेट पर दिल्ली-उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर बंद की गई सड़क को खोलने का अनुरोध करने वाली याचिका में किसान संगठनों को भी पक्षकार बनाने के लिए औपचारिक अर्जी दायर करने की केंद्र को अनुमति दे दी। जस्‍ट‍िस संजय किशन कौल और जस्‍ट‍िस एम एम सुंदरेश की बेंच ने कहा क‍ि समस्याओं का समाधान न्यायिक मंच, विरोध प्रदर्शनों या संसद में बहस के जरिए किया जा सकता है, लेकिन हाइवे को कैसे बंद किया जा सकता है और यह हमेशा के लिए किया जा रहा है। यह कब समाप्त होगा?

क‍िसान आंदोलन के चलते इन रास्‍तों पर द‍िक्‍कत
किसान आंदोलन के चलते दिल्ली एनसीआर का ट्रैफिक काफी समय से बदहाल है। सिंघु और टीकरी बॉर्डर बंद हैं। वहीं दिल्ली को नोएडा से जोड़ने वाला चिल्ला बॉर्डर स‍िर्फ एक तरफ से खुला है। यानी दिल्ली की तरफ से नोएडा जा सकते हैं लेकिन नोएडा से दिल्ली आने के लिए रास्ता किसान आंदोलन के चलते बंद है। इस कारण लोगों को न्यू अशोक नगर या डीएनडी से घूमकर आना होता है। वहीं गाजीपुर बॉर्डर भी फिलहाल एक तरफ से बंद है। यहां दिल्ली की तरफ आने वाला रास्ता बंद है। लोगों को दिल्ली आने के लिए आनंद विहार, डीएनडी, चिल्ला, अपसरा और भोपुरा बॉर्डर का चक्‍क्‍र लगाना पड़ता है।

नोएडा की रहने वाली मह‍िला की याच‍िका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सु्प्रीम कोर्ट नोएडा की रहने वाली मोनिका अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अग्रवाल ने अपनी याचिका में कहा है कि पहले उन्हें दिल्ली पहुंचने में 20 मिनट का समय लगता था और अब उन्हें दो घंटे लगते हैं और दिल्ली की सीमा पर यूपी गेट पर प्रदर्शनों के कारण क्षेत्र के लोगों को परेशानी हो रही है। मामले की सुनवाई की शुरुआत में बेंच ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज से पूछा कि सरकार इस मामले में क्या कर रही है। इसके बाद नटराज ने कहा कि उन्होंने प्रदर्शनकारी किसानों के साथ एक बैठक की और इसकी जानकारी शपथपत्र में दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा सवाल
सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस कौल की बेंच ने कहा कि हम कानूनी व्यवस्था दे सकते हैं लेकिन कानून कैसे लागू होगा उस पर अमल कैसे होगा यह तय करना सरकार का काम है। हम कानून का क्रियान्वयन तो नहीं कर सकते है। यह काम कार्यपालिका का है कि वह कानून पर अमल कराए। इस पर भारत सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह एग्जेक्युटिव (कार्यपालिका) की ड्यूटी है कि वह कानून पर अमल कराए। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब हम कहते हैं कि इस मामले में हम कानून बनाएंगे तो आप (सरकार) कहेंगे कि यह अधिकार क्षेत्र में दखल है और कार्यपालिका के काम में दखल दे रहे हैं।

अगली सुनवाई के लिए 4 अक्टूबर की तारीख तय
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परेशानी लगातार रोजाना की तो नहीं हो सकती है। तब तुषार मेहता ने कहा कि एक हाइ लेवल की कमिटी का गठन किया गया है जो समस्या के समाधान को लेकर बात करे लेकिन किसान संगठन के प्रतिनिधि को बुलाए जाने पर भी वह बातचीत में भाग लेने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में कोर्ट इस बात की इजाजत दे कि हम किसान संगठनों को इस मामले में पक्षकार बनाएं ताकि बाद में वह ये न कहें कि हमें पक्षकार नहीं बनाया गया। तब बेंच ने तुषार मेहता से कहा है कि वह इसके लिए आवेदन दाखिल करे और किसान संगठनों कको पक्षकार बनाए। अगर आप समझते हैं कि किसी किसान लीडर को पार्टी बनाया जाए तो आप उसके लिए फ्री हैं। मेहता ने कहा कि इसके लिए हम शुक्रवार को अर्जी दाखिल कर देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए चार अक्टूबर की तारीख तय कर दी है।