अपने टैलेंट के साथ न्याय नहीं कर पाए सचिन तेंडुलकर : कपिल देव

सचिन तेंडुलकर. क्या क्रिकेट में इनसे बड़ा कोई नाम हुआ है? सवाल बड़ा है और उलझाऊ भी. कम ही प्लेयर ऐसे हुए हैं जिनके लिए कहा जा सकता है कि वो सचिन से बेहतर हैं. उनसे बड़े नाम हैं. सचिन जब तक खेले, लगभग हर महीने नया रिकॉर्ड बनाया. वह वनडे क्रिकेट में 10,000 का जादुई आंकड़ा पार करने वाले पहले क्रिकेटर बने. रिटायरमेंट के सालों बाद भी उनके नाम वनडे और टेस्ट में सबसे ज्यादा रन हैं. सचिन इंटरनेशनल क्रिकेट में 100 सेंचुरी मारने वाले इकलौते क्रिकेटर हैं.

सचिन की अचीवमेंट गिनाने बैठा जाए तो कई दिन लग जाएंगे. सचिन ने जो भी हासिल किया उसमें उनके टैलेंट का बड़ा रोल है. सिर्फ 16 साल की उम्र में डेब्यू करने वाले सचिन अपने टैलेंट की बदौलत इतने आगे तक गए. ऐसे में क्या इस बात का अंदेशा भी जताया जा सकता है कि उन्होंने अपने टैलेंट के साथ न्याय नहीं किया? कम से कम कपिल देव को तो यही लगता है.

# निकलता है ग़लत अर्थ
भारत को वर्ल्ड कप जिताने वाले पहले कप्तान कपिल का मानना है कि सचिन अपने टैलेंट के साथ न्याय नहीं कर पाए. उनके पास जितना टैलेंट है, उसमें उन्हें और अचीव करना चाहिए था. रेडियो सिटी से बात करते हुए कपिल ने कहा,

‘जब मैं बात करता हूं तो लोग मेरे बयान का ग़लत अर्थ निकाल लेते हैं. मेरे हिसाब है, सचिन तेंडुलकर भारत के सर्वोत्तम क्रिकेटर हैं. इसके बाद भी मुझे लगता है कि वह और बेहतर कर सकते थे. उन्होंने पहले ही काफी कुछ किया है और कोई भी उनसे बेहतर नहीं कर पाया है, लेकिन मुझे लगता है, सचिन के पास और भी टैलेंट था.’

कपिल ने देश के लिए 24 साल तक खेलने के लिए भी सचिन को सराहा. उन्होंने कहा कि यह आसान नहीं है.

कपिल बोले,

‘सचिन का करियर बेहतरीन था. देश के लिए 24 साल तक खेलना कहने में भले ही आसान है लेकिन करने में बहुत मुश्किल. मैं दुआ करता हूं कि वह हमेशा खुश रहें. उन्होंने भारत को जितनी खुशियां दी हैं, मैं उन्हें और उनके परिवार को गुड लक कहता हूं. ऐसे हालात में परिवार सबसे ज्यादा बलिदान देता है. मैं सचिन के लिए अच्छी सेहत की दुआ करता हूं. उन्होंने दो दशक तक पीढ़ियों को प्रेरित किया. कई युवाओं ने सचिन बनने के सपने देखे. जब तक हमारे पास उनके जैसे क्रिकेटर हैं, खेल कभी मर नहीं सकता.’

इसी 24 अप्रैल को 47 साल के हुए सचिन तेंडुलकर साल 2013 में क्रिकेट से रिटायर हो गए थे.

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