चार सांपों के बीच गर्दन तक डूबे थे पानी में दंपत्ति, ऐसे बची जान

श्योपुर। जिले में बाढ़ की तबाही का ऐसा मंजर आज तक किसी ने नहीं देखा। लोगों की आंखों के सामने उनके सपनों के आशियाने उजड़ गए। किसी ने अपनी स्वजनों को बाढ़ में फंसे देखा, लेकिन वह उनकी मदद नहीं कर पाए। ऐसा ही मंजर बड़ौदा में सामने आया जहां एक बुजुर्ग दंपती के घर में पानी भर गया, जिससे उनको पूरी रात गर्दन तक पानी में चार सांपों के बीच निकाली पड़ी। बुजुर्ग रातभर जिंदगी और मौत से लड़ते रहे। सुबह जब पानी उतारा तब वह किसी तरह से बचकर वहां से निकले। बुजुर्ग दंपती का कहना है कि वह भीषण काली रात उन्होंने एक-दूसरे को हिम्मत देकर गुजारी।

दो-तीन अगस्त की रात श्योपुर में बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई की कुछ घंटो में सबकुछ बर्बाद हो गया। बाढ़ के कारण बड़ौदा कस्बा पूरा पानी में डूब गया, जिसमें सैकड़ों लोग बाढ़ में फंस गए, लेकिन प्रशासन की तरफ से उन्हे कोई मदद नहीं मिली। बड़ौदा में आई बाढ़ में वार्ड 13 छोटी टोड़ी निवासी मुरारीलाल माली और उनकी पत्नी भरोसी बाई के घर में पानी भर गया। बुजुर्ग होने के कारण वह छत पर नहीं चढ़ सके। जिससे पानी में डूब गए। जिस वजह से उनको पूरी रात घर के एक बरामदे में गर्दन तक पानी में निकालनी पड़ी। बुजुर्ग मुरारीलाल माली बताते हैं, कि पानी में चार सांप बहकर आ गए जो रात पानी में डूबे बुजुर्ग दंपती के आस-पास मंडराते रहे। काफी प्रयास के बाद भी जब बुजुर्ग दंपती को प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिली, तो उन्होंने एक-दूसरे को हिम्मत बंधाई और काली रात से उभरकर सुबह की सूरज की रोशनी देखी। बुजुर्ग का कहना है, कि एक पल तो उन्हें ऐसा लगा कि अब वह अपने बच्चों से कभी मिल पाएंगे। पर कहते हैं न कि मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है। ईश्वरीय कृपा से किसी तरह बुजुर्ग दंपती बच गए और जब वह बाहर निकलने के बाद अपने परिवार से मिले तो उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। बड़ौदा में ऐसे कई लोग थे, जो बाढ़ में फंस गए और उन्होंने किसी तरह अपनी जान बचाई।

नेता से लेकर कलेक्टर तक लगाई गुहार, लेकिन नहीं मिली मदद

बड़ौदा निवासी दंपती के बाढ़ में फंसने की सूचना जब श्योपुर में रह रहे उनके बेटे सुरेश सुमन को मिली तो उन्होंने स्थानीय नेताओं से लेकर कलेक्टर तक मदद के लिए गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। इसी तरह बड़ौदा कस्बे में सैंकड़ों लोग बाढ़ में फंसे हुए थे, जिनको भी प्रशासन की तरफ से निकालने का कोई प्रयास नहीं किया। जिन लोगों के पक्के मकान थे उन्होंने घरों की छत पर चढ़कर अपनी जान बचा ली, लेकिन जिनके कच्चे मकान थे या छत पर चढ़ने का रास्ता नहीं था उन लोगों ने घर डांडे, पंखों आदि से लटकर अपनी जान बचाई।

बाढ़ में सबकुछ हो गया बर्बाद

बुजुर्ग दंपती का कहना है कि बाढ़ से उनका सब कुछ बर्बाद हो गया है। बड़ौदा में दो दिन तक बाढ़ का पानी लोगों को घरों में भरा रहा है, जिससे सबकुछ भीगकर बर्बाद हो गया। लोगों की ऐसी स्थिति हो गई उनके पास एक टाइम का भी खाने का नहीं बचा। दुकानों में भी पानी भरने काफी नुकसान हुआ है, बाढ़ पीड़ित लोग अब मदद के लिए प्रशासन और सरकार की तरफ देख रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली।