आंख फड़कना अशुभ होने का नहीं बल्कि गंभीर बीमारी का है संकेत! तुरंत कर लें ये काम

कई बार हमारे शरीर के अंगों में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव जिन्हें हम सामान्य बात समझ कर नजरअंदाज करते रहते हैं वो आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकते हैं. इंसान की आंख फड़कना भी इन्हीं में से एक है. अमूमन लोग आंख फड़कने को शुभ या अशुभ जैसी धारणाओं से जोड़कर देखते हैं लेकिन हकीकत में ये एक मेडिकल प्रॉब्लम है, जिसके बारे में सही समय पर अलर्ट हो जाना चाहिए.

क्यों फड़कती है आंख?
आंख फड़कने का संबध शुभ या अशुभ संकेत देने से नहीं है बल्कि इसकी वजह है मांसपेशियों में ऐंठन. मेडिकल में इसकी तीन कंडीशन होती हैं- मायोकेमिया , ब्लेफेरोस्पाज्म और हेमीफेशियल स्पाज्म . इन कंडीशन के अलग-अलग कारण और प्रभाव होते हैं.

किस कंडीशन का प्रभाव?
मायोकेमिया मांसपेशियों की सामान्य सिकुड़न के कारण होता है. इससे आंख की नीचे वाली पलक पर ज्यादा असर पड़ता है. ये बहुत थोड़े समय के लिए होता है. ब्लेफेरोस्पाज्म और हेमीफेशियल स्पाज्म दोनों बेहद गंभीर मेडिकल कंडीशन्स में से एक हैं जो अनुवांशिक कारणों से भी जुड़ी हो सकती है. ब्लेफेरोस्पाज्म इंसान की आंख तक बंद हो सकती है. यानी तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.

ब्रेन या नर्व डिसॉर्डर तो नहीं?
डॉक्टर्स के मुताबिक, ब्रेन या नर्व डिसॉर्डर के चलते भी इंसान की आंख फड़क सकती है. लाइफस्टाइल में कुछ खामियों की वजह से भी लोगों को ऐसी दिक्कतें हो सकती हैं.

तनाव को करें कंट्रोल
डॉक्टर्स के मुताबिक तनाव भी इस समस्या का मुख्य कारण है. स्ट्रेस की वजह से भी कुछ लोगों को आंख फड़कने की समस्या होती है. इसलिए अगर आपकी आंख भी फड़कती रहती है तो सबसे पहले तनाव खत्म करें.

आंखों को दें रिलेक्स
आई स्ट्रेन भी इसकी प्रमुक वजह है. अगर आप पूरा दिन टीवी, लैपटॉप या मोबाइल की स्क्रीन के साथ बिता रहे हैं तो इन चीजों से जल्द दूरी बना लीजिए.

नींद पूरी लें
अक्सर हम काम या दौड़-भाग के चलते नींद पूरी नहीं कर पाते तो भी आंख फड़कने की समस्या होने लगती है. इसलिए नींद पूरी लें. डॉक्टर्स के मुताबिक एक इंसान को कम से कम रोजाना 7-9 घंटे सोना चाहिए.

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