कोरोना संकट: पत्थर उबालकर दिलासा देती रही मां, थककर सो गए भूखे बच्चे

कोरोना वायरस की महामारी ने इंसानों को बहुत बड़ी त्रासदी में डाल दिया है. इस त्रासदी की हर रोज एक ऐसी तस्वीर आती है जिससे अंधकार और निराशा का भाव और गहरा जाता है. केन्या से ही एक ऐसा ही मामला सामने आया है.
केन्या के मोम्बासा काउंटी के कासौनी में एक महिला जब भूख से तड़प रहे बच्चों को खाना नहीं दे सकी तो वह उन्हें दिलासा देने के लिए पत्थर उबालने लगी.

पेन्निहा किताओ आठ बच्चों की मां हैं. पति की हत्या के बाद वह अकेले ही घर चलाती हैं. पेन्निहा ने वेबसाइट केन्यन्स.को से बताया कि वह अपने बच्चों के सामने पत्थर उबालकर खाना पकाने का नाटक कर रही थीं ताकि वे शांत हो जाएं और कुछ देर बाद सो जाएं.

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पेन्निहा ने कहा कि बच्चे लगातार रो रहे थे और सोने भी नहीं जा रहे थे. इसलिए मैंने ये ट्रिक आजमाई. मैंने दो बार पत्थर उबाले, इस उम्मीद में कि बच्चों को लगेगा कि कुछ पक रहा है और इंतजार करते करते वे सो जाएंगे. हालांकि, पेन्निहा की ये ट्रिक ज्यादा देर काम नहीं आई. पेन्निहा ने बताया, दूसरे दिन जब मैं बच्चों के लिए पत्थर उबालने के लिए बैठी तो आधी रात में ही बच्चे उठ गए. मेरे एक बच्चे ने कहा कि मैं उनसे झूठ बोल रही हूं कि खाना बन रहा है जबकि मैं केवल पत्थर उबाल रही हूं.

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पेन्निहा की पड़ोसी प्रिस्का न्याकरगियो ने बताया कि उन्होंने एक दिन अपने पड़ोस के घर में रोने-चिल्लाने की आवाज सुनी तो वहां पहुंच गईं. तब उन्हें पेन्निहा की हालत का पता चला. सोशल मीडिया पर पेन्निहा के लिए मदद मांगने वाली प्रिस्का ने कहा, जब मैंने उसकी हालत देखी तो मैं भावुक हो गई. मैं भी एक मां हूं और उसके दर्द को महसूस कर सकती हूं. इसीलिए मैंने उसकी मदद करने के बारे में सोचा. अब कई लोग पेन्निहा की मदद के लिए आगे आ रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पेन्निहा का कहना है कि 2019 में चोरों ने उनके घर पर हमला किया था और उनके पति की हत्या कर दी थी. उस वक्त वह दो महीने की प्रेग्नेंट थीं. इस हालात में पेन्निहा ने कपड़े धोने का काम शुरू कर दिया. लेकिन देश में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आने के बाद ही सब कुछ बदल गया. केन्या में कोरोना संकट में तमाम परिवारों के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो रहा है.

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