20 लाख करोड़ के पैकेज से किसानों को क्‍या मिला, जानिए विस्तार से

नई दिल्‍ली: हमेशा क़ुदरत से लड़ने वाला, हमेशा छोटी-छोटी ज़रूरतों के लिए कर्ज़ लेने, उसे चुकाने और दोबारा कर्ज़ लेते हुए सारा जीवन ग़रीबी में गुज़ारने वाले किसान। कहने को तो ये अन्नदाता हैं, देश की जीडीपी में 17 फीसदी की हिस्सेदारी भी है। लेकिन 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज में किसानों को क्या मिला?

राहत पैकेज का ऐलान करते हुए केंद्र सरकार ने आसान कर्ज़ और किसान क्रेडिट कार्ड से लेकर तमाम तरह की योजनाओं का ऐलान किया। अपने घर लौटने के लिए दर-दर भटकने वाले प्रवासी मज़दूरों को भी कुछ राहत देने का वादा किया गया है। क्या इस आर्थिक पैकेज से अन्नदाता आत्मनिर्भर और मज़दूर मज़बूत बनेगा?
किसानों को क्या मिला ?

अभी-अभी: बडा खुलासा…. सिगरेट के मुकाबले ज्यादा जानलेवा है हुक्का, जानिए कैसे

3 करोड़ किसानों को 4 लाख करोड़ की मदद का ऐलान
2 महीने में 86 हज़ार करोड़ के लोन दिए गए
2 महीने में 63 लाख लोगों को लोन दिया गया
क्रेडिट कार्ड से 25 हज़ार तक कर्ज़ की सुविधा दी
कोऑपरेटिव बैंकों के ज़रिए 29,500 करोड़ का कर्ज़ दिया
राज्यों ने फसल की ख़रीद के रूप में 6,700 करोड़ दिए
गांव के आधारभूत ढांचे के लिए 4,200 करोड़ रुपये दिए
केंद्र सरकार ने 20 लाख के आर्थिक पैकेज में किसानों की बदहाली दूर करने का दावा किया। सरकार के मुताबिक देश के 9 करोड़ किसानों को कैश से लेकर क्रेडिट कार्ड तक कई तरह से मदद दी जा रही है।

PM मोदी के राहत पैकेज में किसानों, मजदूरों को बडी सौगात, यहां देंखे विस्तार से

किसानों को केंद्र से क्या मिला ?

loading...

किसानों की सुविधा के लिए 25 लाख नए किसान क्रेडिट कार्ड बनाए
पीएम किसान योजना के तहत 9.13 करोड़ किसानों को लाभ मिला
किसानों के खातों में 18,253 करोड़ रुपये सीधे ट्रांसफर किये
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत किसानों को मदद दी
पीएम किसान योजना के तहत साल में 3 किस्त में पैसे ट्रांसफर होते हैं
3 किस्त के ज़रिए कुल 6,000 रुपये किसानों के बैंक खाते में पहुंचते हैं
20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज के बावजूद किसानों के सामने बड़ी समस्या ये है कि उनके लिए खेती करने से लेकर फसल बेचने तक तमाम तरह की मुश्क़िलों को आसान बनाया जाए, क्योंकि देश की जीडीपी का 17% किसानों से आता है और आत्मनिर्भर भारत के लिए किसानों को आत्मनिर्भर बनाना बहुत ज़रूरी है।

अभी-अभी: बड़ी चेतावनी: हो सकता है दुनिया से कभी ना जाए कोरोना वायरस, हमेशा साथ रहे: WHO

इसके अलावा केंद्र सरकार की ओर से किसानों के लिए 30,000 एडिश्नल इमरजेंसी वर्किंग कैपिटल फंड का ऐलान किया गया है यानी ये वो रकम होगी, जिससे किसानों के लिए खेती से जुड़े किसी भी तरह के इमरजेंसी हालात में अतिरिक्त आर्थिक मदद दी जा सके। किसानों को सही मायनों में आत्मनिर्भर बनाना बहुत ज़रूरी है।

कृषि प्रधान भारत को जानिये

देश की GDP में करीब 17% कृषि क्षेत्र की है
देश की 50% वर्कफोर्स कृषि से जुड़े रोज़गार में शामिल है
देश में किसानों की संख्या 9 करोड़ से ज़्यादा है
कृषि प्रधान देश में 7,000 से भी कम मंडियां हैं
जबकि देश में कम से कम 42,000 मंडियां होनी चाहिए

Aaj ki taza khabar: देश में 18 मई से बदलेंगे नाई की दुकानों के नियम? जान लें फिर जाये कटवाने…

यानी किसान ज़रूरत से 6 गुना कम मंडियों में फसल बेचते हैं
कम मंडियां होने से आढ़ती और बिचौलिये मनमानी करते हैं
किसानों को ख़ुशहाल बनाने के लिए कई बड़े फ़ैसले ज़रूरी हैं
वेयर हाउस, कृषि मंडियों का विस्तार जल्दी करना होगा
कोल्ड स्टोरेज और मंडियों की संख्या काफ़ी बढ़ानी होगी
ज़्यादा और सस्ते कोल्ड स्टोर से किसानों आत्मनिर्भर बनेंगे
मंडियां ज़्यादा होने से किसान उचित दाम पर फसल बेच सकेंगे

loading…