प्लाज्मा थेरेपी कामयाब, अब कोरोना के इलाज का किया जाएगा ट्रायल

मुंबई: देश इस वक्त कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है। ऐसे में महाराष्ट्र के वैज्ञानिक और डॉक्टर भी कोरोना का इलाज ढूंढने में जुट गए हैं। महाराष्ट्र में प्लाज्मा थेरपी का ट्रायल सफल होने के बाद अब एक और तरीके पर काम किया जा रहा है। दरअसल, महाराष्ट्र के मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट (MED) और हॉफकिन रिसर्च इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिक साथ मिलकर टीबी की दवा बीसीजी यानि बेसिलस कैलमेट-गुएरिन से कोरोना के इलाज के क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी में लगे हुए हैं।

वैक्सीन की क्षमता को जांचने की तैयारी
अब भारत में इंडियन काउंसिल मेडिकल रिसर्च यानि ICMR भी कोरोना के इलाज के लिए इस वैक्सीन की क्षमता को जांचने की तैयारी में जुटा हुआ है। इस वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि क्या इस वैक्सीन से कोरोना के संक्रमण को ठीक किया जा सकता है?

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कोरोना से कम संक्रमित मरीजों पर होगा ट्रायल
हॉफकिन रिसर्च इंस्टिट्यूट यह क्लिनिकल ट्रायल कम कोरोना संक्रमित मरीजों के छोटे बैच पर करेगा। यह ट्रायल राज्य सरकार और इंस्टिट्यूशलन एथिक्स कमिटी से अनुमति मिलने वाले सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ही किया जाएगा।

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डीसीजीआई की अनुमति का हो रहा इंतजार
इस बात की पुष्टि करते हुए मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट (MED) के सेक्रेटरी डॉ. संजय मुखर्जी ने कहा कि हम सभी ड्रग कंट्रोल जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) की इजाजत का इंतजार कर रहे हैं। उसके बाद ही यह ट्रायल शुरु किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीसीजी से कोरोना के इलाज की बहुत चर्चाएं हो रही हैं। हम इस ट्रायल से देखेंगे कि क्या बीसीजी की एक खुराक से COVID- 19 का इलाज संभव है।

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हम इस पर यकीन कर रहे हैं
डॉ. मुखर्जी ने कहा कि हम इस बात की जानकारी है कि बीसीजी का एक थेरपी के तौर पर इस्तेमाल किए जाने से सवाल उठेंगे लेकिन हमारे पास इसकी वजह है, कि हम इस पर यकीन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नवजात बच्चों में टीबी के खिलाफ अवरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बीसीजी का ही यूज किया जाता है। सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत परीक्षणों में बीसीजी के बेहतर नतीजे सामने आए हैं। इसलिए इसके परीक्षण की दिशा में आगे कदम बढाए जा रहे हैं।

कुछ डॉक्टरों ने खड़े किए सवाल
वहीं दूसरी ओर कुछ डॉक्टरों ने बीसीजी के प्रयोग पर चिंता भी जाहिर किया है। कुछ डॉक्टरों का कहना है कि बीसीजी की वैक्सीन Immunity बढ़ाने के लिए कम से कम 2 से 4 हफ्ते का वक्ते लेता है। जबकि कोरोना का नैचरल कोर्स दो सप्ताह का है।

ऐसे में इसका पता कैसे लगेगा कि बीसीजी वैक्सीन ने कोरोना के संक्रमण को कम किया या नहीं? कुछ केसेस में मरीज या तो रिकवर हो कर घर को वापस लौट रहे हैं या फिर उनकी मृत्यु हो जा रही है। अगर मरीज कोरोना से बहुत बुरी तरह से प्रभावित है तो कैसे पता चलेगा?

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