कुलभूषण जाधव मामले में वकील हरीश साल्वे ने खोले पाकिस्तान के कई बड़े राज, जानकर हैरान रह जायेगे आप

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ. RSS. इसका वकीलों से जुड़ा एक संगठन है भारतीय अधिवक्ता परिषद. इसने 2 मई (शनिवार) को एक ऑनलाइन लेक्चर कराया. इसमें शामिल हुए मशहूर वकील हरीश साल्वे. साल्वे ने अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ऑफ जस्टिस यानी आईसीजे में भारत के लिए कुलभूषण जाधव का केस लड़ा. उन्होंने यह केस लड़ने के लिए केवल एक रुपये फीस ली थी. इस केस के बारे में उन्होंने ऑनलाइन लेक्चर में बात की. उन्होंने खुलासा किया कि भारत ने जाधव को छुड़ाने के लिए पाकिस्तान से बैक चैनल बातचीत की थी. लेकिन नतीजा नहीं निकला.
कार्यक्रम के दौरान साल्वे ने पहले जाधव के केस का बैकग्राउंड बताया. कहा कि जाधव भारतीय नौसेना से रिटायर था. वह ईरान में बिजनेस करता था. एक दिन उसका अपहरण कर लिया गया. साल्वे के अनुसार,

तालिबान ने उसे पाकिस्तानी सेना को सौंप दिया. पाकिस्तानी सेना ने ईरान से लगती पाकिस्तान सीमा पर उसे पकड़ा था. यह तथ्य पाकिस्तान ने भी माना है. हालांकि पाकिस्तान यह तो नहीं मानेगा कि तालिबान ने जाधव का अपहरण किया था. लेकिन पाकिस्तानी सेना ने उसे पकड़ा कैसे, इस पर कुछ स्पष्ट नहीं है.

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उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान से कई बार आईसीजे के आदेश को लागू करने के बारे में पूछा. साथ ही जाधव को छोड़ने को भी कहा. बकौल साल्वे,

हम उम्मीद कर रहे थे कि बैक चैनल से उसे (जाधव) छोड़ने के लिए पाकिस्तान को मना लेंगे. इंसानियत के आधार पर या कुछ भी, वे चाहते तो कोई भी वजह दे सकते थे. हम केवल उसे (जाधव) को वापस चाहते थे. हमने कहा कि उसे छोड़ दो. क्योंकि यह पाकिस्तान में ईगो (अहंकार) की बात बन गई थी. इसलिए हमें उम्मीद थी कि वे उसे जाने देंगे. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.

उन्होंने आगे कहा,हमने 4-5 खत़ भी लिखे. लेकिन वे मना करते रहे. मुझे लगता है कि अब हम ऐसे मोड़ पर हैं जहां हमें यह सोचना होगा कि क्या परिणाम देने वाले फैसले के लिए फिर से आईसीजे जाएं. क्योंकि पाकिस्तान तो अपनी जगह से हिला नहीं है.‘हो सकता है जाधव को न्याय दिलाने फिर आईसीजे जाना पड़े’

साल्वे ने कहा कि आईसीजे के आदेश के बाद पाकिस्तान ने उच्चायुक्त से मिलने की अनुमति दी. लेकिन इसमें उसने काफी देर की. उन्होंने कहा,

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पाकिस्तान ने एक तो पूरी दुनिया में यह ढिंढोरा पीट दिया कि वे केस जीते हैं. वे ऐसा सोचते हैं तो यह उनके लिए अच्छा है. अब वे बार-बार कह रहे हैं कि हमें पाकिस्तान के कोर्ट में कार्यवाही के लिए अर्जी देनी होगी. हम कह रहे हैं कि आप आईसीजे के फैसले को कैसे लागू करेंगे. वे इस बात का जवाब नहीं दे रहे. भारत सरकार उन्हें बार-बार लिख रही. हो सकता है जाधव को न्याय दिलाने के लिए हमें किसी दिन फिर से आईसीजे जाना पड़ जाए.

हरीश साल्वे का कहना है कि अभी तक पाकिस्तान ने जाधव मामले की डिटेल भारत को नहीं दी है. उसने न तो एफआईआर की कॉपी दी, न चार्जशीट और न मिलिट्री कोर्ट का ऑर्डर दिया. आईसीजे में पाकिस्तानी वकील के कड़े शब्दों के इस्तेमाल के बारे में साल्वे ने बताया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने कई बार भारत के खिलाफ कड़े शब्द कहे. उन्होंने बताया,

आईसीजे में हमने कभी उनके जैसे शब्द नहीं कहे. मैंने शब्द जांचे थे. पाकिस्तान ने कई बार झूठे, बेईमान और घृणित जैसे शब्द इस्तेमाल किए थे. लेकिन भारत ने ऐसा नहीं किया.

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साल्वे के अनुसार आईसीजे में अमेरिका और ईरान का केस भी चल रहा था. लेकिन उसमें भी शांति थी. जबकि भारत-पाकिस्तान के केस में सुनवाई के दौरान काफी गर्मागर्मी हुई. उन्होंने कहा कि जवाब दाखिल करने की बहस के दौरान पाकिस्तानी वकील अपनी भाषा को लेकर शर्मिॆंदा थे.

जाधव के साथ सरबजीत सिंह जैसा न हो, इसके लिए क्या किया जा रहा है? इस सवाल पर हरीश साल्वे ने कहा कि हम मामले को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की नज़रों में रख रहे हैं. जिससे कि पाकिस्तान जो करता आया है, वह न करे.

बता दें कि सरबजीत सिंह को 1990 में पाकिस्तान के पंजाब में बम धमाकों के मामले में दोषी ठहराया गया था. बाद में कोट लखपत जेल में उस पर कैदियों ने हमला किया. जिसमें सरबजीत की मौत हो गई थी.

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भारत और पाकिस्तान के बीच कुलभूषण जाधव को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही है. जाधव पाकिस्तान की जेल में बंद है. पाकिस्तान ने जाधव को जासूसी का दोषी माना. साल 2017 में उसे पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने फांसी की सजा दे दी. इसके बाद भारत मामले को आईसीजे में ले गया था. भारत की ओर से हरीश साल्वे मुख्य वकील थे. भारत की दलीलों के आधार पर आईसीजे ने जाधव की फांसी पर रोक लगा दी. साथ ही पाकिस्तान से फांसी की सजा के फैसले पर फिर से विचार करने को कहा.

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