भारत के बाद अब अमेरिका ने उठाया चीन के खिलाफ बड़ा कदम, लगा झटका

वाशिंगटन: कोरोना संकट का फायदा उठाने की ताक में चीन को भारत के बाद अब अमेरिका ने भी झटका दिया है। कोरोना वायरस संकट के दौरान चीनी सरकार के अमेरिकी कंपनियों के आक्रामक अधिग्रहण को रोकने के लिए यहां संसद की प्रतिनिधि सभा में विधेयक पेश किया गया। सांसद जिम बैंक्स ने संसद में यह विधेयक पेश किया। सदन की सशस्त्र सेवा समिति के सदस्य बैंक्स ने बुधवार को ‘कोविड-19 (COVID-19) के दौरान आक्रामक अधिग्रहण पर प्रतिबंध अधिनियम’ पेश किया है। इससे पहले भारत चीन और अन्य पड़ोसी देशों से सीधे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर पाबंदी लगा चुका है। जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, इटली भी ऐसा कदम उठा चुके हैं।

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सदन की सशस्त्र सेवा समिति के सदस्य बैंक्स ने बुधवार को ‘कोविड-19 के दौरान आक्रामक अधिग्रहण पर प्रतिबंध अधिनियम पेश किया है। इससे अमेरिकी विदेशी निवेश समिति (सीएफआईयूएस) का दायरा बढ़ेगा। इससे सीएफआईयूएस को कोरोना वायरस संकट के दौरान चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से संबंध रखने वाली कंपनियों के अमेरिकी कंपनियों में निवेश की समीक्षा करने में मदद मिलेगी। बैंक्स ने एक बयान में कहा, ” हमारा काम यह सुनिश्चित करना है कि चीन की सरकार अपने लाभ के लिए इस महामारी का फायदा ना उठाए। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को अमेरिकियों का बेजा लाभ उठाने से रोकने के वादे पर ही चुनाव जीता था। ऐसे में चीन की इस कार्रवाई को रोकने में उनके साथ काम करने को लेकर मैं खुश हूं।

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यह विधेयक अधिग्रहण के अंतिम लेन देन से पहले उसकी जानकारी राष्ट्रपति के पास भेजने की अनुमति भी देगा। यह विधेयक रक्षा उत्पादन अधिनियम 1950 के हिसाब से वर्गीकृत संवेदनशील बुनियादी ढांचे से जुड़ी अमेरिकी कंपनियों में चीन से जुड़ी कंपनियों को 51 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी खरीदने से रोकेगा।

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ता दें कि चीन के सेंट्रल बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने हाउसिंग लोन देने वाली भारत की बड़ी कंपनी एचडीएफसी लिमिटेड (HDFC) के 1.75 करोड़ शेयर खरीदे हैं। भारत ने चीन और अन्य पड़ोसी देशों से सीधे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर पाबंदी लगाई तो चीन भड़क उठा। भारत के इस कदम पर सोमवार को चीन ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के लिए भारत के नए नियम डब्ल्यूटीओ के गैर-भेदभाव के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं और मुक्त और निष्पक्ष व्यापार के खिलाफ हैं। चीन ने आशा व्यक्त की कि भारत ‘भेदभावपूर्ण प्रथाओं’ को संशोधित करेगा। बता दें भारत ने चीन और अन्य पड़ोसी देशों से सीधे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर पाबंदी लगा दी है। महामारी से अर्थव्यस्था में उथल-पुथल के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू कंपनियों का अधिग्रहण रोकने के लिए यह फैसला लिया है।

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