कोरोना के कारण यहां के कब्रिस्तानों में जगह पड रही है कम, एडवांस बुकिंग कर रहे लोग

नई दिल्ली। दिल्ली के सबसे बड़े कब्रिस्तान में कोविड के लिए मिली पांच बीघा जमीन पर अब तक 80 शव दफनाए जा चुके हैं। ये सभी कोरोना वायरस से संबंधित हैं। संदिग्ध और संक्रमित दोनों ही तरह के मृतकों को यहां दफनाया जा रहा है। बृहस्पतिवार को सात शवों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इनमें लोकनायक से तीन, सफदरजंग से दो और मैक्स अस्पताल से एक शव लाया गया, जबकि एक अन्य अस्पताल से भी शाम को शव ले जाया गया।

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आईटीओ स्थित जदीद कब्रिस्तान अल इस्लाम की तीन बीघा जमीन भर चुकी है। सुपरवाईजर मोहम्मद शमीम बताते हैं कि जरूरत पड़ने पर बाकी जमीन को भी इस्तेमाल में लिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि बीते पांच दिन में 16 शव दफनाए जा चुके हैं, जिसमें से आठ शव लोकनायक अस्पताल से लाए गए। हालांकि, दिल्ली सरकार के अनुसार इन पांच दिन में केवल एक व्यक्ति की कोरोना से मौत हुई है। दिल्ली सरकार के हेल्थ बुलेटिन के अनुसार राजधानी में अब तक कोरोना वायरस से 65 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, राजधानी के अलग-अलग शमशान घाट और कब्रिस्तान ले जाए जाने वाले शवों की संख्या इनसे ज्यादा है। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के एक शीर्ष निदेशक का कहना है कि अगर कोई मरीज संदिग्ध होता है और उसकी मौत हो जाती है तो उसका शव प्रबंधन ठीक वैसा ही किया जाता है जैसा कि कोविड पॉजिटिव के लिए किया जा रहा है।

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मोहम्मद शमीम बताते हैं कि उनके यहां दफनाए गए शवों में ज्यादातर कोरोना संक्रमित हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो संदिग्ध थे। अस्पताल से उन्हें शव लाए जाने की सूचना मिल जाती है। कब्रिस्तान पहुंचने पर वह डेथ सर्टिफिकेट जरूर देखते हैं, जिसमें लिखा होता है कि यह शव कोविड पॉजिटिव का है अथवा नहीं। नॉन कोविड मृतक को इस पांच बीघा जमीन पर नहीं दफनाया जाता है। शमीम का यहां तक कहना है कि इस कोविड जगह पर 9 माह से लेकर 85 वर्ष तक की आयु के व्यक्ति की कब्र है। तब्लीगी जमात से जुड़े चार मृतकों के शव अब तक उनके यहां पहुंचे हैं, जिनमें एक विदेशी नागरिक भी शामिल है। मोहम्मद शमीम ने बताया कि आईसीयू में भर्ती कई मरीज के परिजन अब तक कब्रिस्तान आ चुके हैं।

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ऐसा ही एक केस के बारे में उन्होंने बताया कि सरिता विहार में एक बड़ा प्राइवेट अस्पताल है, जहां 32 वर्षीय महिला का लिवर प्रत्यारोपण होना था, लेकिन कोरोना के चलते उसकी हालत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया था। महिला वेंटिलेटर पर थी। बुकिंग कराने के लिए परिजन यहां पहले आए थे, लेकिन कब्रिस्तान बुकिंग नहीं करता है। उन्होंने बताया कि हर दिन लोग यहां बुकिंग कराने के लिए आ रहे हैं। ये सभी कोरोना से जुड़े हुए हैं।कोरोना के चलते परिजनों को दूर रखा जा रहा है। ऐसे में शवों को दफनाने के लिए एक जेसीबी कब्रिस्तान में है, जो प्रति शव छह हजार रुपये शुल्क लेती है। कब्रिस्तान प्रबंधन से इसका कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, मृतक का परिवार गरीब होने पर प्रबंधन की ओर से जेसीबी शुल्क माफ तक कराने की अपील की जाती है।

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