BIG NEWS: किसान आंदोलन के बीच भाजपा का डंका, एकतरफा जीत से विपक्ष मायूस

अहमदाबाद। गुजरात में स्थानीय निकाय चुनाव के वोटों की गिनती जारी है। छह बड़े शहरों में नगर निगम चुनाव की भी काउंटिंग हो रही है। यहां कुल 144 वॉर्डों की 576 सीटों के लिए 21 फरवरी को मतदान हुआ था। बीजेपी ने इन सभी नगर निगमों में भारी बढ़त बनाई है। वहीं कांग्रेस को नतीजों से बड़ा झटका लगता दिख रहा है। पार्टी किसी भी नगर निगम में आगे नहीं है।

आइए जानते हैं इन सभी नगर निगमों की काउंटिंग का हाल…

नगर निगम- कुल सीटें (आगे/जीते) बीजेपी कांग्रेस अन्य
अहमदाबाद- 192 (100) 82 16 2
सूरत- 120 (80) 56 8 16
वडोदरा- 76 (35) 27 8 0
राजकोट- 72 (48) 48 0 0
भावनगर- 52 (27) 20 7 0
जामनगर- 64 (32) 23 6 3
कुल सीटें- 576 (322 के रुझान) 256 45 21

गुजरात नगर निकाय चुनाव में बीजेपी बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है। अहमदाबाद में बीजेपी ने कांग्रेस को बहुत पीछे छोड़ दिया है। यहां बीजेपी तीन चौथाई बहुमत के करीब दिख रही है। रुझान अगर नतीजों में बदलते हैं तो बाकी पांच नगर निगमों में भी बीजेपी कांग्रेस को मात देती नजर आ रही है। बीजेपी ने सूरत, वडोदरा, राजकोट, भावनगर और जामगनगर नगर निगम में कांग्रेस को शिकस्त दी है। रुझानों में वह इन पांचों नगर निगमों में काफी आगे चल रही है।

आम आदमी पार्टी का सूरत मेें अच्छा प्रदर्शन
इस चुनाव में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने भी किस्मत आजमाई है। रुझानों के अनुसार, आम आदमी पार्टी 18 सीटों पर आगे चल रही है। AAP की सारी बढ़त सूरत नगर‍ निगम में सामने आ रही है। इसके अलावा अहमदाबाद, वडोदरा, जामनगर, भावनगर और राजकोट में पार्टी का कोई उम्‍मीदवार अभी आगे नहीं चल रहा है।

ओवैसी की पार्टी अहमदाबाद में कुछ सीटों पर आगे
ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम कुल 2 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। ये दोनों सीटें अहमदाबाद नगर निगम की हैं। AIMIM के उम्‍मीदवार बाकी नगर निगमों में कोई कमाल नहीं कर सके हैं। आम आदमी पार्टी ने कुल 470 सीटों पर अपने कैंडिडेट उतारे थे।

अहमदाबाद में हुई थी सबसे कम वोटिंग
नगर निगम चुनाव के लिए 21 फरवरी को मतदान हुआ था। अहमदाबाद में सबसे कम 38.73 फीसदी वोटिंग हुई थी। वहीं सबसे अधिक 49.86 फीसदी वोट जामनगर में पड़े। इसी तरह, राजकोट में 47.27 फीसदी, भावनगर में 43.66 फीसदी, सूरत में 43.52 फीसदी और वडोदरा में 43.47 फीसदी मतदाताओं ने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। बीजेपी का पहले भी इन सभी नगर निगमों पर कब्जा था।

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