चौंका देने वाला सच: बेकार है डिग्री – नौकरी के काबिल नहीं भारत के 50 फीसदी ग्रेजुएट

नई दिल्ली: भारत में बढ़ती बेरोजगारी चिंता का विषय है। अब भारत के पढ़े-लिखे युवाओं और देश के शिक्षण संस्थानों के लिए बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है। वह ये कि देश के 50 फीसदी ग्रेजुएट नौकरी के काबिल नहीं हैं। युवा डिग्री तो हासिल कर लेते हैं लेकिन कोई हुनर या काम करने की योग्यता नहीं सीख पाते हैं। ये शिक्षा व्यवस्था की असलियत बताने वाली इस रिपोर्ट का नाम है इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2020। इसमें दावा किया गया है कि भारत के युवाओं की नौकरी पाने के लिए योग्यता में पिछले चार सालों से बढ़ोतरी नहीं हुई है और देश के 50 फीसदी ग्रेजुएट भी नौकरी के काबिल नहीं हैं।

इंडिया स्किल्स रिपोर्ट का ये आठवां संस्करण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के सिर्फ 45.9 फीसी ग्रेजुएट ही नौकरी पाने के लायक हैं। ये आंकड़ा पिछले तीन सालों में सबसे कम रहा है। साल 2019-20 में यह 46.21 फीसदी थी और साल 2018-19 में 47.38 प्रतिशत था। इस बार चार से तीन प्रतिशत का गिरावट है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं नौकरी के लिए पहली पसंद है और पुरुषों से ज्यादा महिलाएं नौकरी के लिए योग्य हैं।

महिलाएं हैं पहली पसंद
रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि महिलाएं नौकरी के लिए पहली पसंद तो हैं लेकिन फिर भी महिलाओं के मुकाबले पुरुषों को नौकरी के मौके ज्यादा मिलते हैं। भारत में नौकरी करने वाले कर्मचारियों में तकरीबन 64 फीसदी प्रोफेशनल्स पुरुष हैं और 36 फीसदी महिलाएं हैं। महिलाएं सबसे ज्यादा 46 प्रतिशत बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में काम कर रही हैं। वहीं ऑनलाइन बिजनेस में महिलाओं की संख्या 39 फीसदी है। पुरुषों की बात करें तो सबसे ज्यादा 79 प्रतिशत पुरुष ऑटोमोटिव सेक्टर में काम कर रहे हैं। वहीं 75 फीसदी लॉजिस्टिक्स सेक्टर में और 72 फीसदी कोर एंड एनर्जी सेक्टर में हैं।

यूपी के ग्रेजुएट ज्यादा योग्य
इंडिया स्किल्स रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक राज्य के ग्रेजुएट्स युवा नौकरी पाने के सबसे ज्यादा योग्य हैं। वहीं शहरों की बात की जाए तो हैदराबाद, बंगलुरू और पुणे के युवा नौकरी पाने के सबसे काबिल हैं। इस साल मुंबई टॉप 10 शहरों की सूची से बाहर है।

बीटेक को मिला सबसे ज्यादा काम
आम धारणा है कि देश में इंजीनियरों की भरमार है। बीटेक की जरूरत से ज्यादा सप्लाई हो रही है लेकिन इस धारणा के विपरीत 46.82 फीसदी के साथ बीटेक ग्रेजुएट्स को सबसे ज्यादा नौकरियां मिली हैं, इसके बाद एमबीए में 46.59 फीसदी के करीब लोगों को रोजगार मिला है। इंडिया स्किल रिपोर्ट यूएनडीपी, एआईसीटीई, एआईयू, सीआईआई और टैग्ड के साथ मिलकर व्हीबॉक्स संस्था ने तैयार की है।

किन कोर्स वालों को मिला सबसे ज्यादा रोजगार?
इंजीनियरिंग किए हुए स्टूडेंट्स को सबसे ज्यादा रोजगार मिला है। इंडिया स्किल रिपोर्ट के मुताबिक 2015 में बीटेक वालों को 54 फीसदी तो 2020 में 46.93 फीसदी रोजगार मिला। इसके बार एमबीए वालों को सबसे ज्यादा 2020 में 46.59 फीसदी रोजगार मिला। वहीं, रोजगार के मामले में एमसीए वाले 22.42 फीसदी के साथ सबसे पीछे खड़े हैं।

इंडिया स्किल रिपोर्ट से पता चलता है कि महिलाएं नौकरी के लिए पुरुषों से ज्यादा योग्य हैं लेकिन फिर भी महिलाओं के मुकाबले पुरुषों को नौकरी के ज्यादा अवसर मिलते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सभी पेशेवरों में से 64 फीसदी पुरुष हैं, जबकि महिलाओं की संख्या केवल 36 फीसदी है। सबसे ज्यादा 46 फीसदी महिलाएं बैंकिंग और फाइनांशियल सेक्टर में हैं। इंटरनेट बिजनेस में महिलाओं की संख्या 39 फीसदी है। वहीं, पुरुषों की संख्या ऑटोमोटिव सेक्टर में 79 फीसदी के साथ सबसे ज्यादा है। इसके बाद 75 फीसदी पुरुष लॉजिस्टिक्स सेक्टर और 72 फीसदी कोर एंड एनर्जी सेक्टर में हैं।

योग्यता में विकास नहीं
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले चार सालों से भारत के युवाओं की एम्प्लॉयबिलिटी यानी नौकरी हासिल करने की योग्यता में कोई विकास नहीं हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक यह आंकड़ा तीन साल से 46 प्रतिशत के आस पास ही घूम रहा है। कंपनियों से लोगों को भर्ती करने के उनके इरादों में पूछने पर पता चला कि वो अभी भी महिलाओं के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़ी संख्या में पुरुषों को भर्ती करने का इरादा रखती हैं। 2020 में हायरिंग इंटेंट का पुरुषों और महिलाओं का अनुपात 71:29 था। शायद इसीलिए नौकरी करने वाले लोगों की कुल आबादी में 64 प्रतिशत पुरुष हैं और सिर्फ 36 प्रतिशत महिलाएं। बी.टेक और एमबीए करने वाले युवाओं को सबसे ज्यादा नौकरी पाने के लायक बताया गया है. 2019 में पहले स्थान पर एमबीए था और 2018 में बी.टेक. बी.फार्मा, बी.कॉम और बीए करने वालों की योग्यता में बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2021 में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में सबसे ज्यादा लोगों को नौकरी पर रखा जाएगा। इसके बाद नंबर स्वास्थ्य क्षेत्र, ऑटो, रिटेल, लॉजिस्टिक्स और फिर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों का है। दिल्ली-एनसीआर इलाके में सबसे ज्यादा नौकरियां मिलेंगी. उसके बाद नंबर है कर्नाटक और महाराष्ट्र का।

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