साइको किलर की कहानी : रेप करने के बाद औरतों को मारने से पहले यातना देने में मुझे मजा आता…

नई दिल्‍ली : हिंदुस्‍तान के इतिहास में यूं तो अपराध की दुनिया में कई बड़े क्रिमिनल्‍स का नाम कुख्‍यात है, लेकिन एक क्रिमिनल ऐसा भी रहा, जिसका दक्षिण भारत में खौफ सा छा गया था. यह अपराधी एक साइको किलर था. उसका टारगेट सिर्फ महिलाएं ही हुआ करती थीं. वह उनसे रेप करने के बाद उन्‍हें बुरी तरह टॉर्चर करता और मौत के घाट उतार देता. माना जाता है क‍ि इस साइको किलर ने रेप की करीब 30 वारदातों को अंजाम द‍िया और मरने तक वह 19 औरतों को मौत के घाट उतार चुका था. 4 साल तक तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश में वह बेखौफ होकर इन वारदातों को अंजाम देता रहा. यह क्रिमिनल कहता कि रेप करने के बाद औरतों को मारने से पहले यातना देने में उसे बहुत मजा आता है.

इस कुख्‍यात क्रिमिनल का नाम था एम जयशंकर. तमिलनाडु के सालेम का रहने वाला कुख्यात ‌किलर एम जयशंकर पहले पेशे से ट्रक ड्राइवर था. उसकी तीन बेटियां हैं. उसने 2008 में क्राइम की दुनिया में कदम रखा. उनका पहला दर्ज अपराध 3 जुलाई 2009 को था, जब उसने पेरंदहल्ली में 45 वर्षीय पी. श्यामला का बलात्कार और हत्या करने का प्रयास किया. अगस्त 2009 तक उसने करीब 12 महिलाओं का बलात्कार और हत्या कर दी थी और अन्य छह महिलाओं का बलात्कार किया था.

जयशंकर इतना कुख्‍तात क्रिमिनल रहा कि उसके किस्‍से बेहद चर्चित हो चले. बकायदा वीकीपीडिया पेज पर उसके बारे में विस्‍तृत जानकारी उपलब्‍ध है. यहीं से पता चलता है कि जयशंकर हमेशा अपने साथ एक ब्लैक हैंड बैग लेकर जाता था. इसमें वह एक बड़ा चाकू रखता. जो भी उसका विरोध करता वह इसी चाकू से उसे मारता. ज्‍यादातर वह हाइवे पर बने ढाबों के पास सेक्‍स वर्कर्स का अपहरण करता. उनका बलात्कार करता और उन्हें बेरहमी से मार देता था. उसने ग्रामीण इलाकों में फार्म हाउसों में भी महिलाओं को भी निशाना बनाया.

23 अगस्त 2009 को जयशंकर ने 39 वर्षीय पुलिस कॉन्‍स्‍टेबल एम. जयमणि के साथ बलात्कार किया और उसकी हत्या कर दी. जयमणि उप मुख्यमंत्री एम. के स्टालिन की यात्रा के दौरान पेरुमानल्लूर में अस्थायी ड्यूटी पर आई थी. जयशंकर ने उसका अपहरण कर लिया और उसे मारने से पहले कई बार उसका बलात्कार किया. पुलिस ने एक महीने बाद 19 सितंबर को जयमणि का शव बरामद किया.
तिरुप्पुर पुलिस ने जयशंकर को पकड़ने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया. 19 अक्टूबर 2009 को उसे गिरफ्तार कर लिया गया. उसे कोयंबटूर सेंट्रल जेल में बंद किया गया था. इस समय तक उस पर तिरुपुर, सलेम और धर्मपुरी में बलात्कार और हत्या के 13 अलग-अलग मामलों के आरोप लगाए गए थे. हिरासत में जाते वक्‍त उसने खुलासा किया कि महिलाओं के साथ बलात्कार करने और उन्हें मारने से पहले उन्हें यातना देने में मजा आता था.

17 मार्च 2011 को जयशंकर को हत्या के मुकदमे के लिए धर्मपुरी की एक फास्ट-ट्रैक अदालत में ले जाया गया. अगले दिन सशस्त्र रिजर्व पुलिस के सिपाही एम चिन्नास्वामी और राजावेलु को उसे वापस कोयम्बटूर ले जाने के लिए सौंपा गया. रास्ते में जयशंकर सलेम बस स्टैंड पर लगभग 9:30 बजे उसकी कस्‍टडी से भागने में सफल हो गया. इससे परेशान 19 मार्च को चिन्नासामी ने कथित तौर पर खुद को गोली मार ली.

यहां से जयशंकर कर्नाटक भाग गया, जहां उसने अगले एक महीने के दौरार नही बेल्लारी में छह महिलाओं के साथ बलात्कार किया और उनकी हत्या कर दी. उसने धर्मपुरी में एक शख्‍स और एक बच्चे को भी मार डाला.

उसे पकड़ने के लिए पूरे तमिलनाडु और कर्नाटक में जगह जगह उसके पोस्‍टर लगाए गए. 4 मई 2011 को कर्नाटक के एक गांव में एक महिला से रेप करने के प्रयास में वह पकड़ा गया. यहां खुद गांववालों ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया.

2011 में गिरफ्तारी के बाद जयशंकर को बेंगलुरु के परप्पाना अग्रहारा सेंट्रल जेल में रखा गया था. उसे 27 साल जेल की सजा सुनाई गई थी. यहां उसकी मानसिक बीमारी का इलाज भी चलता रहा.

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट बताती है कि 2013 में वह इस जेल से भी भाग निकला. पुलिस ने कर्नाटक के सभी पुलिस स्टेशनों को रेड अलर्ट जारी किया और महिलाओं से सुनसान स्थानों में सावधान रहने का आग्रह किया. उसकी गिरफ्तारी के लिए किसी भी जानकारी देने के लिए उसके सिर पर 500,000 के इनाम की घोषणा की गई.

पुलिस ने जयशंकर के अलग-अलग फोटोग्राफिक प्रोफाइल के साथ पांच भाषाओं, हिंदी, कन्नड़, मराठी, तमिल और तेलुगु में 10,000 वान्‍टेड पोस्टर और 75,000 पर्चे छपवाए. कर्नाटक के अलावा ये पोस्टर और पर्चे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल और महाराष्ट्र में बांटे गए.

पुलिस ने जयशंकर को 6 सितंबर 2013 को दोपहर गिरफ्तार कर लिया. जयशंकर को सजा काटने के लिए सेंट्रल जेल, बेंगलुरु भेजा गया था. यहां उसे 24/7 सीसीटीवी निगरानी और अतिरिक्त रोशनी के साथ एक उच्च-सुरक्षा कक्ष में रखा गया था. उसके सेल का लॉक इस तरह से डिज़ाइन किया गया कि वह उसकी पहुंच से बाहर हो. यह निर्णय लिया गया कि किसी बीमारी के मामले में उसे अस्पताल ले जाने के बजाय, उसकी सेल के अंदर ही उसका इलाज किया जाए.

25 फरवरी 2018 को, जयशंकर ने बैंगलोर सेंट्रल जेल से फ‍िर भागने की असफल कोशिश की. इसमें विफल होने के बाद उसे एकान्त कारावास में रखा गया. इसके बाद 27 फरवरी को उसने एक शेविंग ब्लेड से अपना गला काटकर आत्महत्या कर ली, जिसे उसने एक दिन पहले एक नाई से हासिल किया था.

जेल के कर्मचारियों ने अपने दैनिक विजिट के दौरान लगभग 2:30 बजे उसे खून से सना पाया. उसे प्राथमिक चिकित्सा प्रदान की गई. बाद में उसेविक्टोरिया अस्पताल ले जाया गया, जहां सुबह 5:10 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया. इस तरह एक कुख्‍यात रेपिस्‍ट और हत्‍यारे का अंत हुआ.

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