स्त्रियों को जब मिला था मासिक धर्म का श्राप, तो साथ मिला था ये अनोखा वरदान

स्त्री अपने आप में ही ईश्वर की बनाई एक बहुमूल्य रचना है जिसके बारे में आप जितनी रिसर्च करेंगे उतनी ही बाते आपको मालूम चलती चली जायेगी तो ऐसे में मासिक धर्म से जुडी कुछ एक कथाये भी जिनके बारे में हिन्दू धर्म में अक्सर ही बताया जाता है हालाँकि मानने वाले मानते है और न मानने वाले नही मानते है ये उनकी सबकी अपनी अपनी चॉइस है इसमें किसी को भी फ़ोर्स नही किया जा सकता है.

एक कथा के मुताबिक़ ब्रह्महत्या के कारण एक श्राप था जिसे चार जातियों में बाँट दिया गया दरअसल उन्होंने राक्षसों के एक शुभचिंतक गुरु की हत्या कर दी जिससे उन पर ब्रह्महत्या का पाप लगा और बादमे उनकी तपस्या से ये पाप चार जातियों पंडित, स्त्री, धरती और पेड़ को बाँट दिया गया लेकिन पाप के साथ उन्हें वरदान भी मिला चलिए जानते है आखिर वो वरदान क्या क्या थे?

पहला वरदान तो ब्राह्मण को मिला कि उसे भिक्षा मांगकर के खाना होगा लेकिन इसके बावजूद उसकी बुद्धिमता और चतुरता और बढ़ेगी और बनी भी रहेगी जिससे सभी जातियों के बीच ज्ञान का स्त्रोत तो वही ही रहेगा.

इसके बाद बारी आती है दूसरी जाति पेड़ की जिसे पाप संग वरदान भी मिला कि वो अपने आप को दुबारा से जीवित करने की शक्ति पायेगा और आप देख सकते है कि सूखे से सूखे पेड़ भी बारिश के मौसम में अपने आप हरे भरे हो जाते है.

धरती को पाप के साथ साथ एक वरदान भी मिला कि वो अपनी चोट खुद ही भर सकेगी और आप देख सकते है कि एक समय के बाद धरती अपने सामान्य स्वरुप में आ जाती है चाहे वहाँ इन्सान कुछ भी किये हो और इसमें लग वर्षो जाते है लेकिन धरती अपने मूल स्वरुप में बनी ही रहती है.

इस ऋषि के श्राप की वजह से स्त्रियों को होता है मासिक धर्म –
एक आखिरी जाति बची थी स्त्री जिसे मासिक धर्म भोगना पडा इसी के कारण लेकिन साथ ही ये वरदान भी मिल गया कि वो एक पुरुष की तुलना में सम्बन्ध बनाते समय दुगुना आनंद ले पायेगी और ये चीज भी आज की तारीख में आप ये चीज भी देख ही रहे है.re

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