एम्स में वैक्सीन से पहले आई यह गुड न्यूज! यहां जानें

नई दिल्ली। कई बार गलत लगने वाली घटना, दूसरे पहलू से देखने पर ठीक ही लगती है। एम्स (AIIMS) में कोविड- 19 महामारी के खिलाफ जारी वैक्सीन ट्रायल (Vaccine trial) से जुड़ी घटना के साथ भी यही हुआ। यहां देश के पहली देसी कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन का मानव परीक्षण (Human trial) चल रहा है लेकिन दिलचस्प बात यह हुई कि जिन लोगों ने कोवैक्सीन के परीक्षण के लिए अपना नाम रजिस्टर कराया, उनमें प्रति पांच में एक की औसत से पहले ही एंटीबॉडी (Antibody) से युक्त पाए गए। एम्स में जारी परीक्षण के लिए कुल 80 लोगों ने दिलचस्पी दिखाई। इन 80 में से 16 लोगों में एंटीबॉडी विकसित मिली।

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि एम्स में जब वैक्सीन ट्रायल के लिए वाल्युंटियर्स का रजिस्ट्रेशन होने लगा तो 80 में से सिर्फ 16 लोगों का ही चयन किया जा सका। एम्स सूत्रों ने बताया कि करीब-करीब 20% वॉल्युंटियर्स में ऐंटीबॉडीज पाए गए हैं। इसका मतलब है कि वो कोरोना वायरस से पहले ही संक्रमित हो चुके हैं। बाकी लोगों में लीवर या किडनी की कुछ-ना-कुछ समस्या है। एम्स के एक डॉक्टर ने कहा, एंटीबॉडीज पाए जाने का मतलब है कि व्यक्ति संक्रमित हुआ था और वह वायरस को परास्त कर ठीक भी हो चुका है। इसलिए ऐसे लोगों पर वैक्सीन के प्रभाव का आकलन नहीं हो सकता।

अब वैक्सीन ट्रायल के हिसाब से देखें तो लगेगा कि इसमें थोड़ी बाधा आ रही है लेकिन दूसरा पहलू यह भी है कि देश में एक बड़ी आबादी है जिनमें सार्स कोव- 2 के प्रति एंटीबॉडीज विकसित हो रहे हैं, बिना स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के। एम्स में वैक्सीन ट्रायल के लिए रजिस्टर्ड लोगों का ही उदाहरण ले लें तो मतलब साफ है कि 20% लोगों में ऐंटीबॉडीज विकसित हो चुके हैं। दूसरे शब्दों मे कहें तो देश में कोरोना वायरस के खिलाफ हर्ड इम्युनिटी विकसित हो रही है जो बड़ी राहत की बात है। इससे पहले सीरो सर्वे में भी 22% से अधिक लोगों में हर्ड इम्युनिटी विकसित होने का प्रमाण मिल चुका है।

बहरहाल, एम्स को वैक्सीन ट्रायल के लिए कुल 100 लोगों की जरूरत है जिन्हें टीका लगाने के बाद कम-से-कम दो हफ्ते तक एक्सपर्ट डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाएगा। इस दौरान उन पर वैक्सीन के असर का आकलन होगा। इसके लिए 18 से 55 वर्ष की उम्र के वैसे लोगों का चयन किया जा रहा है जो दिल (हर्ट), गुर्दा (किडनी), जिगर (लिवर) या फेफड़ा (लंग) से संबंधित बीमारी नहीं हो। साथ ही, उनमें अनियंत्रित डाइबिटीज या हाइपरटेंशन की समस्या भी नहीं होनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति के आखिरी चयन से पहले उनका लीवर, किडनी, कोविड- 19 और रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किए जाते हैं।

एम्स को वैक्सीन ट्रायल के लिए 3,500 वॉल्युंटियर्स के आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। 24 जुलाई को 30 साल के एक युवक को कोवैक्सीन का पहला डोज दिया जा चुका है। उसे वैक्सीन की 0.5 एमएल की खुराक दी गई। डॉक्टर ने बताया कि अब एक हफ्ता हो चुका है। अगले शुक्रवार तक उसकी निगरानी की जाएगी, फिर अगली खुराक दी जाएगी।

भारतीय आर्युविज्ञान अनुसंधान संस्थान (ICMR) ने एम्स समेत देश के कुल 12 संस्थानों का चयन किया है जहां कोवैक्सीन का पहले और दूसरे चरण के मानव परीक्षण किया जा सकता है। पहले चरण में वैक्सीन का 75 लोगों पर परीक्षण होगा। इनमें सबसे ज्यादा 100 लोगों पर परीक्षण एम्स में होगा। दूसरे चरण में सभी 12 संस्थानों में 750 वॉल्युंटियर्स पर परीक्षण होगा।

ध्यान रहे कि हैदराबाद की दवा निर्माता कंपनी भारत बायोटेक ने नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरॉलजी, पुणे और आईसीएमआर के सहयोग से कोवैक्सीन विकसित किया है। भारतीय दवा नियामक ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) ने इसके पहले और दूसरे चरण के मानव परीक्षण की अनुमति दी थी। ट्रायल में भाग लेने का इच्छुक कोई भी व्यक्ति एक ईमेल [email protected] पर भेज सकता है या 7428847499 पर कॉल कर सकता है।

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