मुस्लिम बना भगवान: 8 माह की बच्ची को दी नई ज़िंदगी, पूरे देश में हो रहा नाम

इटावा- आज ईद उल अज़हा का पर्व है पूरे देश दुनियां में इस पर्व पर मुस्लिम समुदाय के लोग जानवरों की कुर्बानी देकर अपने पर्व को मनाते हैं। ईद उल अज़हा का पर्व त्याग, कुर्बानी का पर्व है। आज इसी पर्व पर एक 8 माह की बच्ची मुस्कान की जान बचाने इटावा शहर के कटरा सहाब ख़ाँ मौहल्ले के मोहम्मद शोएब अख़्तर फरिश्ता बनकर रक्तदान करने जिला अस्पताल पहुंचे।

जिला अस्पताल में एक बच्ची को उसके जीवन के लिए O- निगेटिव खून की आवश्यकता थी, यह ब्लड ग्रुप डॉक्टरों के मुताबिक बहुत दुर्लभ बताया जाता है। जिसके कारण यह ब्लड आसानी से नही मिलता लेकिन शोएब अख्तर को इसकी जैसे ही जानकारी हुई उन्होंने अपने त्यौहार की परवाह न करते हुए सीधे ब्लड बैंक जा पहुंचे और बच्ची के लिए रक्तदान किया।

ब्लड बैंक में खून मौजूद नही
डॉ० भीमराव अंबेडकर (सयुंक्त) जिला चिकित्सालय में एक 8 माह की बच्ची मुस्कान को कल रात इमेरजेंसी इटावा में खून की कमी होने के चलते भर्ती करवाया गया था। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में कोरोना काल के चलते डोनरों द्वारा ब्लड डोनेट न किए जाने के कारण ब्लड बैंक में खून की किल्लत काफी समय से बनी हुई है। बच्ची को एटा जनपद से उसके परिजनों ने इटावा के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया था। जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे O- निगेटिव खून लाने के लिए कहा क्योंकि ब्लड बैंक में खून मौजूद नही था। जिसके बाद कड़ी मेहनत करने पर शहर के एक मुस्लिम युवक ने बच्ची के लिए ब्लड डोनेट किया जिससे बच्ची की जान बचाई जा सकी।

जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने आज सुबह ब्लड अस्पताल की ब्लड बैंक से O निगेटिव खून के लिए जब सम्पर्क किया तब बैंक कर्मियों ने ब्लड की कमी होने की असमर्थता जताई। जिसके बाद ब्लड बैंक के लैब टेक्नीशियन अर्जुन सिंह ने सोशल मीडिया पर एक सन्देश सर्कुलेट किया। और लोकल के मीडिया कर्मियों से मैसेज को ग्रुपों में भेजने का आग्रह किया जिसके बाद मीडियाकर्मियों ने भी मैसेज को वायरल किया।

जिसके तुरन्त बाद इटावा नगर के पूर्व नगरपालिका चैयरमेन कुलदीप गुप्ता, संटू ने ब्लड बैंक से सम्पर्क साधा मामले की पुष्टि की और अपने एक साथी जिसका ब्लड ग्रुप O पॉजिटिव था। सनी परमार को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे लेकिन उससे पूर्व ही शोएब अख्तर नाम के एक युवक ने बच्ची के लिए रक्तदान कर चुके थे। वही सोशल मीडिया पर मैसेज देखकर तीसरे युवा डोनर लोकेश कुकरेजा भी ब्लड बैंक ब्लड डोनेट करने पहुंच गए थे।

लंबे समय से बच्ची की तबियत ठीक नहीं
एटा जनपद के रहने वाली पूनम देवी एक गरीब परिवार है। इनकी बच्ची खुसबू को काफी समय से बुखार आ रहा था। जिसके बाद एटा के अलीगंज अस्पताल में इलाज के बाद डॉक्टरों ने उसको खून न मिलने की कमी के चलते ले जाने को कहा तब जाकर किसी ने पूनम देवी को इटावा अस्पताल ले जाने की सलाह दी जिस पर पूनम इटावा के सरकारी अस्पताल में अपनी बच्ची को लेकर शुक्रवार की शाम को अस्पताल में भर्ती करवाया था। दुर्लभ ब्लड मिल जाने के बाद पूनम ने मोहम्मद शोएब अख्तर को दिल से दी दुआएं ।

महिला पूनम को नही पता था कि उसकी बच्ची को खून देने वाला युवक किस जाति धर्म का है। पूनम को जब पता चला युवक मुस्लिम धर्म का है तो पूनम की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए और शोएब से मिलने के लिए उसके बारे में पूछने लगी लेकिन तब तक शोएब ब्लड डोनेट कर के वहां से जा चुका था।

इटावा जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में आम दिनों में 300 से 400 यूनिट सभी ब्लड ग्रुपों का मौजूद रहता था। लेकिन कोरोना काल में डर की वजह से लोग रक्तदान करने से घबरा रहें हैं। जिस वजह से काफी समय से जिला अस्पताल में अब 10 ,15 यूनिट ही ब्लड स्टॉक में मौजूद रहता है, और वो भी साधारण ब्लड ग्रुप जबकि ब्लड बैंक में 300, 300 के क्षमता वाले दो बड़े फ्रीजर मौजूद है। लेकिन ब्लड यूनिट के नाम पर बस कुछ ही यूनिट ब्लड बैंक में इस समय मौजूद है।

मुझे नही पता यह बच्ची कौन है कहा से आई है
8 माह की मुस्कान के चेहरे पर फिर से मुस्कान बिखेरने वाले रक्तदाता शोएब ने कहा मुझे नही पता यह बच्ची कौन है कहा से आई है। मुझे जैसे ही इस बात की जानकारी हुई कि किसी को O निगेटिव ब्लड की आवश्यकता है। मैं त्यौहार पर सारा कामकाज छोड़कर हॉस्पिटल ब्लड देने के लिए आगया। मुझे खुशी है कि मेरे खून से आज मासूम मुस्कान की जान बच गई आज ईद का दिन है। मुझे दोगुनी खुशी है कि आज त्यौहार भी है और मेरे द्वारा दिए गए खून से इस बच्ची की जान बच गई।

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